Old vs New Tax Regime: 1 अप्रैल से इनकम टैक्स के नए नियम लागू हो चुके हैं और इसके साथ ही टैक्सपेयर्स के मन में वही पुराना सवाल फिर से चल रहा है कि ओल्ड टैक्स रिजीम चुनें या न्यू? सरकार अब न्यू रिजीम को डिफॉल्ट बनाकर इसे बढ़ावा दे रही है, जहां टैक्स की दरें कम हैं और कागजी कार्रवाई का झंझट नहीं है. लेकिन क्या कम टैक्स का मतलब हमेशा ज्यादा बचत होता है? यहां हम आपको बताएंगे कि आपके हिसाब से कौन सा सिस्टम आपके लिए पैसा वसूल साबित होगा.
न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट ऑप्शन
पिछले कुछ सालों में आपके टैक्स भरने और निवेश करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव आया है. अब न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट ऑप्शन है, जिसका मतलब है कि अगर आपने ओल्ड टैक्स रिजीम या न्यू टैक्स रिजीम में से किसी एक का चुनाव नहीं किया, तो आपकी कमाई पर नए सिस्टम से टैक्स कटेगा.
पुराने सिस्टम में आपको टैक्स बचाने के लिए PPF, LIC या ELSS जैसी जगहों पर पैसा डालना पड़ता था, जिससे आपकी बचत मजबूरी में ही सही, लेकिन हो जाती थी. न्यू रिजीम में यह मजबूरी खत्म हो गई है, जिससे अब निवेश करना पूरी तरह आपकी अपनी इच्छा पर निर्भर है.
ओल्ड टैक्स रिजीम में सेविंग और टैक्स बेनेफिट्स
ओल्ड टैक्स सिस्टम उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो निवेश के बहाने अपनी संपत्ति जोड़ना चाहते हैं. इसमें टैक्स की दरें तो ज्यादा हैं, लेकिन आप सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट पा सकते हैं. इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस (80D), होम लोन का ब्याज और HRA जैसे फायदों का इस्तेमाल करके आप अपनी टैक्सेबल इनकम को काफी कम कर सकते हैं. यह सिस्टम उन लोगों के लिए रिवॉर्ड जैसा है जो पहले से निवेश कर रहे हैं या जिनके सिर पर होम लोन और रेंट जैसी जिम्मेदारियां हैं. सीधे शब्दों में कहें तो ओल्ड रिजीम आपसे जबरदस्ती पैसे बचवाता है.
न्यू टैक्स रिजीम में कम टैक्स, लेकिन बचत मुश्किल
न्यू टैक्स रिजीम आपको आजादी देता है. यहां टैक्स की दरें कम हैं और स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट के साथ ₹12.75 लाख तक की सालाना आय वाले जीरो टैक्स के दायरे में आ सकते हैं. इसमें आपको कोई इन्वेसटमेंट प्रूफ नहीं देना होता, जिससे हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा बचता है. यह उनके लिए अच्छा है जिन्होंने अभी करियर शुरू किया है या जो लॉक-इन पीरियड वाले निवेश में पैसा नहीं फंसाना चाहते. लेकिन यहां रिस्क यह है कि हाथ में आया एक्स्ट्रा पैसा अक्सर निवेश होने के बजाय लाइफस्टाइल, ऑनलाइन शॉपिंग या खाने-पीने पर खर्च हो जाता है.
न्यू रिजीम में मिलने वाला एक्स्ट्रा पैसा अक्सर गायब हो जाता है क्योंकि हमें लगता है कि हम अगले महीने से इन्वेस्टमेंट शुरू करेंगे, लेकिन वह दिन कभी नहीं आता. ओल्ड रिजीम में टैक्स बचाने का सोचकर पैसा पहले ही इन्वेस्ट हो जाता है.हालांकि, ओल्ड सिस्टम में लोग अक्सर टैक्स बचाने के चक्कर में आखिरी वक्त पर गलत इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद लेते थे, लेकिन न्यू रिजीम आपको सोच-समझकर निवेश करने का मौका देता है.
आपके लिए कौन सा टैक्स सिस्टम सही?
आपका फैसला आपके स्वभाव पर निर्भर करना चाहिए. अगर आप एक निवेशक हैं जो टैक्स के बिना भी SIP और म्यूचुअल फंड में निवेश जारी रखते हैं, तो न्यू रिजीम आपके लिए बेहतर है. वहीं अगर आप तभी निवेश करते हैं जब टैक्स बचाने की डेडलाइन सिर पर हो, तो ओल्ड रिजीम ही आपके लिए बेहतर है क्योंकि यह आपको भविष्य के लिए एक फंड बनाने पर मजबूर करता है. हाई-इनकम वाले लोग जिनके पास होम लोन और इंश्योरेंस जैसी कई कटौतियां हैं, उनके लिए अब भी पुराना सिस्टम ही ज्यादा टैक्स बचाने वाला साबित हो सकता है.हालंकि, बेस्ट रिजीम वही है जिसे आप असल में फॉलो कर सकें और जो आपके लॉन्ग टर्म गोल्स में आपकी मदद करे.














