नोएडा@50: लग्‍जरी लिंविंग लाइफ, इंटरनेशनल एयरपोर्ट, ग्‍लोबल हब, शानदार इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर... कैसा दिखेगा भविष्‍य का महानगर?

नोएडा @50: जेवर एयरपोर्ट, AI हब और ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग के जरिए नोएडा बन रहा है भविष्य का ग्लोबल हब. अगले दशक में यह शहर न केवल रहने के लिए सबसे बेहतर होगा, बल्कि दुनिया के बिजनेस मैप पर भारत का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरेगा.

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Noida future roadmap: जेवर एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डेटा सेंटर, AI हब और मैन्युफैक्चरिंग निवेश के साथ नोएडा अगले दशक में भारत का प्रमुख लग्जरी लिविंग और ग्लोबल रिटेल हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

Noida 50 years: आज जब नोएडा अपने 50 साल पूरे कर रहा है और गोल्डन जुबली मना रहा है, तब यह शहर सिर्फ NCR का एक बड़ा रियल एस्टेट सेंटर नहीं रह गया है. आज जब हम इस शहर की ओर देखते हैं, तो यह सिर्फ कंक्रीट का जंगल नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की इकोनॉमी का पावरहाउस नजर आता है.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी अब सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेट नहीं रहा, बल्कि एक बड़ा 'मैन्युफैक्चरिंग हब' बन चुका है. जेवर एयरपोर्ट के आने से और नए इंडस्ट्रियल सेक्टर्स के विकास से नोएडा अब ग्लोबल मैप पर चमकने को तैयार है.

आने वाले दशक में नोएडा जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, डेटा सेंटर, AI हब और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स के सहारे लग्जरी लिविंग और ग्लोबल रिटेल हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर, सेक्टर-150 जैसे प्रीमियम माइक्रो-मार्केट, इंडस्ट्रियल टाउनशिप और टेक्नोलॉजी सेंटर मिलकर नोएडा को भविष्य का इंफ्रास्ट्रक्चर , टेक्नोलॉजी , निवेश का सुपरहब बना रहे हैं.

नोएडा के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्‍य में NDTV ने अपने पाठकों के लिए खास सीरीज 'नोएडा@50' पेश की है. इसी कड़ी में यहां हम बात करने वाले हैं, नोएडा के भविष्‍य के रोडमैप की.  

नोएडा एयरपोर्ट यूपी की किस्मत बदलने वाला 'गेम चेंजर'

जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट(Noida International Airport)  उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है.अनुमान है कि  एयरपोर्ट ऑपरेशंस के छठे साल से यह एयरपोर्ट सालाना 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू देगा .रिपोर्ट के अनुसार, पूरी तरह चालू होने के बाद यह एयरपोर्ट अकेले ही यूपी के GDP में 1% से ज्यादा योगदान दे सकता है.एयरपोर्ट ऑपरेशन के छठे साल से ही यह हर साल 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू पैदा कर सकता है.

धार्मिक, मेडिकल और बिजनेस टूरिज्म को मिलेगा बड़ा फायदा

एयरपोर्ट बनने से वाराणसी, मथुरा, वृंदावन और आगरा जैसे शहर सीधे ग्लोबल कनेक्टिविटी से जुड़ेंगे. इससे धार्मिक, मेडिकल और बिजनेस टूरिज्म में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है.साथ ही फल, सब्जियां, डेयरी और फूल जैसे प्रोडक्ट्स सीधे इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंच सकेंगे, जिससे किसानों की आय 20-30% तक बढ़ सकती है.

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रोजगार के लाखों अवसर, एयरपोर्ट बनेगा जॉब इंजन

अनुमान है कि शुरुआती 5 वर्षों में एयरपोर्ट से सीधे तौर पर 50,000 से ज्यादा डायरेक्ट जॉब और 5 लाख से ज्यादा इनडायरेक्ट जॉब पैदा होंगे. आगे चलकर यह संख्या बढ़कर 40 से 50 लाख रोजगार अवसरों तक पहुंच सकती है.

रियल स्टेट और इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट का नया सेंटर बनेगा यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर 

जेवर एयरपोर्ट के कारण नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर तेजी से बड़े इन्वेस्टमेंट सेंटर बन रहे हैं.SquareYards रिपोर्ट के अनुसार,जेवर एयरपोर्ट के पास प्लॉट की कीमतें 28% तक और अपार्टमेंट की कीमतें 22% तक बढ़ सकती हैं.एयरपोर्ट के आसपास होटल, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है.यमुना एक्सप्रेसवे पर 'Ace YXP' जैसे प्रोजेक्ट्स ग्लोबल रिटेल और एंटरटेनमेंट का अनुभव देने के लिए तैयार हैं.

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एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटी, दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर से बढ़ेगा व्यापार

जेवर एयरपोर्ट की लोकेशन इसे बेहद खास बनाती है. यह ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के करीब है. वहीं, हाल ही में 12,000 करोड़ की लागत में शुरू हुआ दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर दिल्ली से देहरादून की यात्रा के समय को 6 घंटे से घटाकर 2.5 घंटे कर देगा.  इससे पश्चिमी यूपी के उद्योग, कृषि और व्यापार को बड़ा फायदा मिलेगा और नोएडा-NCR की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी.

यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे फिल्म सिटी, ओलंपिक सिटी और लॉजिस्टिक हब जैसे प्रोजेक्ट्स नोएडा को एक सुपर-कनेक्टेड रीजन बना रहे हैं. 

Sector-150 बनेगा नोएडा का नया लक्गरी लिविंग मार्केट 

सेक्टर-150 तेजी से नोएडा का प्रीमियम रियल एस्टेट हब बनकर उभर रहा है.यह सेक्टर यमुना एक्सप्रेसवे के सबसे नजदीक नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे से जुड़ा और जेवर एयरपोर्ट के करीब स्थित है.यहां प्रॉपर्टी की कीमतें अभी 14,000 से 17,000 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच हैं.करीब 300 एकड़ क्षेत्र में फैले इस सेक्टर का 70% हिस्सा ग्रीन स्पेस के लिए निर्धारित है, जिससे यह लो-डेंसिटी प्रीमियम लिविंग का बड़ा सेंटर बन रहा है.

यहां ACE ग्रुप जैसे बड़े डेवलपर्स 'स्पोर्ट्स सिटी' और ग्लोबल स्टैंडर्ड के अपार्टमेंट्स बना रहे हैं.सेक्टर-150 में विकसित हो रही Sports City योजना इसे सिर्फ रिहायशी इलाका नहीं बल्कि हेल्थ-फोकस्ड लाइफस्टाइल डेस्टिनेशन बना रही है.यहां स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एरिया और लो-डेंसिटी वाली प्लानिंग निवेशकों और होमबायर्स को आकर्षित कर रही है.नोएडा का सेक्टर 150 अब दिल्ली-एनसीआर का सबसे नया  लग्जरी डेस्टिनेशन बन चुका है.

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AI हब और डेटा सेंटर्स की नई दुनिया,टेक्नोलॉजी कैपिटल बनने की तैयारी

नोएडा और उत्तर प्रदेश अब सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेट नहीं बल्कि तेजी से टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी उभर रहे हैं.भविष्य की इंडस्ट्री अब सिर्फ फैक्ट्री तक सीमित नहीं है. नोएडा और आसपास का इलाका अब  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी का सेंटर बन रहा है. नोएडा अब उत्तर भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब बन चुका है.टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के साथ मिलकर यूपी में टेक्नोलॉजी रिवॉल्यूशन लाई जा रही है. नोएडा और लखनऊ जैसे शहरों में TCS के हजारों प्रोफेशनल्स AI और क्लाउड कंप्यूटिंग पर काम कर रहे हैं.ये सेक्टर आने वाले समय में नोएडा-UP को डिजिटल इंडस्ट्री का बड़ा केंद्र बना सकते हैं.

नोएडा के 50 साल पूरे होने के साथ अब शहर का फोकस सिर्फ रिहायशी विस्तार नहीं बल्कि ग्लोबल कनेक्टिविटी, इंडस्ट्रियल ग्रोथ, टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर है.जेवर एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डेटा सेंटर, AI हब और मैन्युफैक्चरिंग निवेश के साथ नोएडा अगले दशक में भारत का प्रमुख लग्जरी लिविंग और ग्लोबल रिटेल हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

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नोएडा@50

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