क्या आपने कभी बैंक से बड़ा अमाउंट निकाला हो और बाद में काम ना बनने पर वही पैसा फिर से बैंक में जमा कर दिया हो? अगर हां, तो अब थोड़ा अलर्ट हो जाएं. ऐसा इसलिए क्योंकि टैक्स डिपार्टमेंट ऐसी अमाउंट को आपकी अनडिक्लेयर्ड इनकम मान सकता है और उस पर टैक्स लगा सकता है. आसान भाषा में कहें तो ये पूछा जा सकता है कि ये पैसा कहां से आया. दरअसल एक ऐसा ही मामला सामने आया है. जहां एक महिला ने बैंक से 15 लाख रुपये निकाले, उसके बाद उन्होंने उन्हीं पैसों को बैंक में जमा कर दिया. इसके बाद टैक्स डिपार्टमेंट ने उन्हें नोटिस थमा दिया.
हालांकि इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने कहा कि अगर शख्स ये साबित कर दे कि बैंक में जमा पैसा वही है जो पहले निकाला था, तो उसे अनडिक्लेयर्ड इनकम नहीं माना जा सकता.
मामला नोटबंदी के समय का
ये मामला नोटबंदी के समय का है. एक महिला टैक्सपेयर ने नोटबंदी से पहले अपने बैंक खाते से किस्तों में करीब 15 लाख रुपये निकाले थे. जब नोटबंदी हुई, तो उन्होंने वही 15 लाख रुपये वापस अपने खाते में जमा कर दिए. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को ये बात हजम नहीं हुई. उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति इतनी बड़ा अमाउंट घर में नहीं रखेगा, वो इसे कहीं निवेश करेगा या ब्याज कमाएगा. इसके बाद डिपार्टमेंट ने इसे अनडिक्लेयर्ड इनकम मानते हुए धारा 69A में टैक्स और जुर्माना लगा दिया. इसके बाद मामला ITAT यानी इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल तक पहुंचा.
टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी राहत
अमूमन लोग जमीन खरीदने, शादी या मेडिकल इमरजेंसी के लिए बैंक से कैश निकालते हैं. कई बार जरूरत नहीं होती तो लोग ये पैसा हफ्तों या महीनों बाद वापस जमा कर देते हैं. ऐसे में टैक्स डिपार्टमेंट का सेक्शन 68 या 69A परेशानी बनकर सामने आ जाता है. इसलिए ITAT का ये फैसला बड़ी राहत के रूप में देखा जा सकता है.
बड़ा अमाउंट निकालते समय इन बातों का ध्यान रखें
बड़े अमाउंट निकालने के बाद बैंक स्टेटमेंट अपने पास संभाल कर रखें. ऐसा इसलिए क्योंकि जब भी टैक्स डिपार्टमेंट नोटिस भेजे तो आपके पास इसका रिकॉर्ड मौजूद हो.
कैश फ्लो स्टेटमेंट को मैनेज करें. मतलब कि आप बिजनेस में हैं, तो अपनी बुक्स में कैश इन हैंड का रिकॉर्ड ठीक रखें.
इन सभी के अलावा विड्रॉल करने बाद जल्दी ही आप उसे डिपॉजिट कर देते हैं यानी समय का अंतर ज्यादा नहीं होता, तो केस उतना ही मजबूत होगा. हालांकि इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि अगर समय का अंतराल भी अगर ज्यादा है पर सोर्स की पूरी जानकारी है तब भी टैक्सपेयर को राहत दी जाएगी.














