भारत-EU व्यापार समझौता (FTA) विदेशी शराब के शौकीनों के लिए भी अच्छी खबर लेकर आई है. इस डील से यूरोपीय देशों से आने वाली शराब काफी सस्ती होने वाली है. करीब 18 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने दुनिया के सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया है. इस समझौते से वोदका, शैम्पेन जैसी विदेशी शराब से लेकर लग्जरी कारों तक काफी कुछ सस्ता हो जाएगा. वर्तमान में भारत विदेशी वाइन पर 150% तक का भारी आयात शुल्क (Import Duty) लगाता है. समझौते के तहत इसे घटाकर 20% तक लाया जाना है. इसे मोटा-मोटी ऐसे समझिए कि करीब 6,000 रुपये की मूल कीमत वाली विदेशी शराब तो भारत में 15,000 रुपये में मिला करती थी, वो आने वाले समय में महज 7,200 रुपये में मिल जाएगी.
विदेशी शराब और बीयर की कीमतों में राहत
ईयू-भारत ट्रेड डील से यूरोप के मशहूर वाइन और स्पिरिट ब्रैंड्स भारत में अब कम दाम पर उपलब्ध होंगे. इस FTA के तहत वाइन (Wine) पर लगने वाली ड्यूटी में कटौती का फैसला लिया गया है. विदेशी वाइन पर 150% तक के भारी आयात शुल्क (Import Duty) की जगह इसे धीरे-धीरे 20% तक लाने का प्रस्ताव है. इस कटौती का सीधा मतलब यह है कि फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे यूरोपीय देशों से आने वाली प्रीमियम वाइन की कीमतें भारतीय बाजार में काफी कम हो जाएंगी.
कौन-कौन सी शराब सस्ती हो जाएगी?
- फ्रेंच वाइन (French Wine): बोर्डो (Bordeaux), बरगंडी (Burgundy), शैम्पेन (Champagne)
- इटालियन वाइन (Italian Wines): चियांटी (Chianti), प्रोसेको (Prosecco), बारोलो (Barolo)
- स्पेनिश वाइन (Spanish Wines): रियोजा (Rioja), कावा (Cava)
- यूरोपीय स्पिरिट्स (European Spirits): कॉन्यैक (Cognac), आर्मग्नाक (Armagnac), प्रीमियम जिन (Premium Gins) और वोदका (Vodkas)
- जर्मन बीयर (German Beers): प्रीमियम लैगर्स (Premium Lagers) और एल्स (Ales)
आपके कितने पैसे बचेंगे?
आयात शुल्क 150% से घटकर 20% होना एक बहुत बड़ा बदलाव है. इसे शैम्पेन (Champagne) के एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए एक प्रीमियम शैम्पेन की बेसिक कीमत (सीमा शुल्क मूल्य/CIF Value) 5,000 रुपये है.
इस कैलकुलेशन में आप एक अंदाजा लगा सकते हैं कि 5,000 रुपये की शैम्पेन की बोतल, जो आपको फिलहाल 12,500 रुपये की पड़ रही है, आने वाले समय में 6,000 रुपये की पड़ेगी. यानी ये आपको आधी से भी कम कीमत में मिल जाएगी और आपको सीधे तौर पर 6,500 रुपये की बचत होगी. टैक्स का अंतर एक बड़ा फैक्टर है. अभी आप शराब की कीमत से डेढ़ गुना ज्यादा सिर्फ टैक्स दे रहे हैं, जो घटकर कीमत का केवल पांचवां हिस्सा रह जाएगा.
हालांकि ये बात भी ध्यान रखना चाहिए कि अंतिम रिटेल कीमत (MRP) में राज्य सरकार के टैक्स (Excise Duty) और डीलर का मार्जिन भी जुड़ता है, जो अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकता है.














