शेयर बाजार के लिए आज 6 अप्रैल, सोमवार से शुरू हो रहा हफ्ता काफी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है. एक तो पहले से ही ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रही जंग और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार का सेंटिमेंट प्रभावित कर रखा है, निवेशकों की नजरें RBI के मौद्रिक नीति फैसले और अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर टिकी हैं, जो बाजार को नई दिशा दे सकते हैं. इतने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बयान बम' का अलग ही असर दिख सकता है. ट्रंप ने एक बार फिर हफ्ता शुरू होने, यानी सोमवार से पहले युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिसका भारतीय शेयर बाजार समेत दुनियाभर के प्रमुख बाजारों पर असर पड़ सकता है. ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर 'कयामत ढाने' की धमकी दे डाली है.
ट्रंप ने होर्मूज स्ट्रेट खोलने के लिए मंगलवार रात 8 बजे तक का अल्टीमेटम दिया है. कहा है कि ईरान के पास 48 घंटे हैं. इसके बाद अमेरिका पूरी तबाही मचा देगा.
दरअसल, ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच मार्च से अप्रैल 2026 तक वैश्विक बाजारों ने जिस तरह रोलर-कोस्टर सवारी की, उसकी सबसे बड़ी वजह सिर्फ जंग नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बदलते बयान रहे. हर आक्रामक टिप्पणी ने न केवल शेयर बाार, बल्कि तेल और मुद्रा बाजारों में भूचाल ला दिया, जबकि हर नरमी ने निवेशकों को थोड़ी उम्मीद दी.
ट्रंप के बयान और उनका असर
- 9 मार्च 2026 को इसका पहला बड़ा असर दिखा. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्क आइलैंड “पूरी तरह तबाह' कर दिया गया है. इस बयान से तेल सप्लाई को लेकर डर बढ़ा और ब्रेंट क्रूड 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. भारत में इसका सीधा असर दिखा-सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट आई, रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ, जबकि सोना-चांदी में तेज उछाल आया क्योंकि निवेशक सुरक्षित विकल्प तलाशने लगे.
- 16 मार्च को ट्रंप के और सख्त रुख ने बाजारों की चिंता बढ़ा दी. ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के बीच उन्होंने कहा कि दबाव और बढ़ेगा. इससे यह आशंका गहराई कि खाड़ी से तेल सप्लाई बाधित हो सकती है. नतीजा-कच्चे तेल और गैस की कीमतें फिर उछलीं, और भारतीय बाजारों में बिकवाली बढ़ गई.
- हालांकि 17 मार्च को अचानक राहत मिली. 'पीस प्लान' की खबर लीक होने के बाद बाजारों ने तेजी से रिकवरी की. सेंसेक्स-निफ्टी में सुधार आया, रुपया थोड़ा मजबूत हुआ और सोने की कीमतों में भी स्थिरता आई.
- 23 मार्च को ट्रंप ने बातचीत के संकेत दिए और होर्मुज जलडमरूमध्य पर डेडलाइन बढ़ा दी. इससे तेल बाजार में स्थिरता आई और शेयर बाजारों को सहारा मिला.
- 30 मार्च को फिर से डर लौट आया. ट्रंप ने ईरान के पूरे ऊर्जा ढांचे को “नेस्तनाबूद' करने की धमकी दी. इस बयान से ब्रेंट क्रूड फिर 118 डॉलर के पार पहुंच गया. शेयर बाजारों में गिरावट और रुपये पर दबाव साफ दिखा, जबकि सोना फिर चमका.
- 31 मार्च को ट्रंप ने यू-टर्न लेते हुए कहा कि अमेरिका 2-3 हफ्तों में ऑपरेशन खत्म कर सकता है. इस बयान ने बाजारों को राहत दी-वॉल स्ट्रीट में तेजी आई और एशियाई बाजारों ने भी उछाल दिखाया.
अब बात अप्रैल की-जहां उथल-पुथल फिर बढ़ी
1-2 अप्रैल के दौरान अमेरिकी प्रशासन के भीतर मतभेद की खबरें आईं. ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि सभी विकल्प खुले हैं, जिससे बाजार फिर असमंजस में आ गया. तेल कीमतों में हल्की तेजी रही, लेकिन निवेशक सतर्क बने रहे. 3 अप्रैल (शुक्रवार) को ट्रंप ने फिर सख्त बयान देते हुए कहा कि अगर ईरान ने शर्तें नहीं मानीं, तो निर्णायक कार्रवाई होगी. इस बयान से वैश्विक बाजारों में हल्की गिरावट आई, हालांकि पहले जैसी घबराहट नहीं दिखी-क्योंकि निवेशक अब इन बयानों के आदी हो चुके थे.
और अब बाजार खुलने से एक दिन पहले फिर 'बयान बम'
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि आने वाले दिनों में बड़ी सैन्य और आर्थिक घोषणा की जाएगी. इस बयान ने बाजारों में नई चिंता पैदा कर दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि सोमवार को बाजार खुलते ही फिर से अस्थिरता देखने को मिल सकती है. तेल में उछाल, शेयर बाजारों में दबाव और सोने में मजबूती संभव है.
मार्च के पूरे महीने और अप्रैल के शुरुआती दिनों के घटनाक्रम से साफ है कि इस युद्ध में सिर्फ मिसाइलों का ही नहीं, बयानों का भी उतना ही असर देखने को मिल रहा है. खासकर ट्रंप के बयानों को लेकर. सेंसेक्स, निफ्टी, रुपया, कच्चा तेल और सोना-सब ट्रंप के हर शब्द पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. निवेशकों के लिए इसे फूंक-फूंक कर कदम रखने वाला समय बताया जा रहा है.
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