- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पूरी क्षमता से काम करने पर यूपी की GDP में 1% से ज्यादा बढ़ने की संभावना है
- एयरपोर्ट ऑपरेटर कंपनी प्रति यात्री 400.97 रुपये प्रीमियम देगी, जिससे सरकार को सालाना ₹28,000 करोड़ मिलेंगे
- नोएडा एयरपोर्ट से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से कुल 50 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने का अनुमान है
How Noida Airport likely to Boost UP Economy: उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है. वो अध्याय है- जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida Intrnational Airport, Jewar). वो सपना, जो ढाई दशक के लंबे इंतजार के बाद साकार हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सीएम योगी आदित्यनाथ और अन्य लोगों की मौजूदगी में जेवर एयरपोर्ट (Jewar Airport) के पहले फेज का उद्घाटन किया. जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) सिर्फ जहाजों के उड़ने का अड्डा नहीं, बल्कि भारत की 'ग्रोथ इंजन' बनने की राह पर है. सरकारी आंकड़े और रिसर्च रिपोर्ट्स की मानें तो ये एयरपोर्ट आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वो रफ्तार देगा, जिसका सपना दशकों से देखा जा रहा था.
पीडब्ल्यूसी (PwC) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ये प्रोजेक्ट शुरू होने के छठे साल से हर साल 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू जेनरेट करेगा. आइए समझते हैं कि कैसे ये एक अकेला एयरपोर्ट यूपी की GDP और आम आदमी की किस्मत बदलने जा रहा है.
यूपी की GDP में 1% का सीधा उछाल
किसी एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का राज्य की GDP में 1% से ज्यादा का योगदान देना अपने आप में एक मिसाल है. अधिकारियों का अनुमान है कि जब यह एयरपोर्ट पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर देगा, तो यूपी की अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से अधिक होगी. यह आंकड़ा सुनने में छोटा लग सकता है, लेकिन 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे उत्तर प्रदेश के लिए यह एक बहुत बड़ी छलांग है.
रेवेन्यू का 'ज्यूरिख मॉडल', 2,800 करोड़
नोएडा एयरपोर्ट का प्रबंधन देख रही कंपनी 'ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी' ने प्रति यात्री 400.97 रुपये का प्रीमियम देने का वादा किया है. यानी जब एयरपोर्ट 7 करोड़ यात्रियों की क्षमता पर पहुंचेगा, तो केवल इस प्रीमियम से सरकार को 2,800 करोड़ रुपये मिलेंगे. इसके अलावा, एयरपोर्ट के अंदर शॉपिंग, रिटेल और खाने-पीने (Non-Aeronautical) से होने वाली आय भी सालाना 1,400 करोड़ रुपये के पार जाने की उम्मीद है.
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बंपर रोजगार: 50 लाख लोगों को मिलेगा काम
इंटरनेशनल सिविल एविगेशन ऑर्गेनाइजेशन (ICAO) का एक दिलचस्प गणित है. इसके मुताबिक, हवाई परिवहन पर खर्च किया गया हर 100 रुपये अर्थव्यवस्था को 325 रुपये का फायदा पहुंचाता है. यही नहीं, विमानन क्षेत्र में पैदा होने वाली हर 100 सीधी नौकरियां, पूरी इकोनॉमी में 610 अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करती हैं.
- डायरेक्ट जॉब्स: शुरुआती 5 वर्षों में ही एयरपोर्ट ऑपरेशंस, ग्राउंड हैंडलिंग, सिक्योरिटी और रिटेल जैसे क्षेत्रों में 50,000 से ज्यादा सीधी नौकरियां मिलेंगी. इसमें कार्गो, लॉजिस्टिक्स और मेंटेनेंस (MRO) का बड़ा हिस्सा होगा.
- इनडायरेक्ट जॉब्स: असली जादू अप्रत्यक्ष रोजगार में दिखेगा. कृषि, ट्रांसपोर्ट, सप्लाई चेन, MSME और होटल सेक्टर में शुरुआत में 5 लाख और लंबी अवधि में 40 से 50 लाख रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
रियल एस्टेट में 'गोल्ड रश', 28% तक बढ़ेंगे दाम
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे का बेल्ट अब ग्लोबल इन्वेस्टमेंट हब बन चुका है. 'स्क्वायर यार्ड्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, एयरपोर्ट के आसपास जमीनों (Plots) की कीमतों में 28% और अपार्टमेंट्स में 22% तक का उछाल आने वाले कुछ ही वर्षों में देखने को मिलेगा. शहरी विस्तार अब सिर्फ नोएडा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा तक दिखेगा. यहां बड़े पैमाने पर होटल्स, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और डेटा सेंटर्स की मांग बढ़ने वाली है.
'फार्म-टू-ग्लोबल': किसानों की आय 30% तक बढ़ेगी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए यह एयरपोर्ट किसी वरदान से कम नहीं है. फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद और फूलों जैसे जल्दी खराब होने वाले (Perishable) उत्पादों के लिए यहां विशेष कार्गो सुविधा होगी. अब जेवर, बुलंदशहर और अलीगढ़ का किसान सीधे लंदन या दुबई के बाजारों में अपना माल बेच सकेगा. इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और किसानों की आय में 20 से 30 प्रतिशत की सीधी बढ़ोतरी होने का अनुमान है. यह 'फार्म-टू-ग्लोबल मार्केट' मॉडल का सबसे सफल उदाहरण बनेगा.
धार्मिक और मेडिकल टूरिज्म को लगेंगे पंख
जेवर एयरपोर्ट दुनिया के नक्शे पर वाराणसी, मथुरा, वृंदावन और आगरा को सीधे जोड़ देगा. विदेशी पर्यटक जो अब तक दिल्ली उतरकर सड़क मार्ग से परेशान होते थे, वे सीधे इन धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के करीब उतर सकेंगे. इससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि मेडिकल टूरिज्म (विदेशी मरीजों का इलाज) के क्षेत्र में भी नोएडा एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं का रनवे है. जानकारों का कहना है कि ये लॉजिस्टिक्स की लागत घटाएगा, सप्लाई चेन सुधारेगा और उत्तर प्रदेश को सही मायने में 'उत्तम प्रदेश' से 'उद्यम प्रदेश' की ओर ले जाएगा.
Research: आमोद प्रकाश सिंह, एडिटोरियल रिसर्च, NDTV
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