Goldman Sachs Oil Price Forecast: दुनिया का पावर मार्केट इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा है. ईरान से जुड़ा युद्ध और मिडिल ईस्ट में चल रही टेंशन की वजह से हालात और बिगड़ गए हैं. इसी बीच गोल्डमैन सैक्स ने कच्चे तेल की कीमतों पर अपनी नई रिपोर्ट जारी की है. ये रिपोर्ट इशारा कर रही है कि आने वाले समय में तेल महंगा हो सकता है, जिससे आम लोगों और सरकारों दोनों पर असर पड़ सकता है. यानी ये एक तरह की चेतावनी जैसे है कि हालात और मुश्किल हो सकते हैं.
$90 के पार जाएगा ब्रेंट क्रूड
गोल्डमैन सैक्स बैंक का अनुमान है कि चौथी तिमाही में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल रहेगी, जबकि पहले ये अनुमान 80 डॉलर का था. वहीं WTI की कीमत 83 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जो पहले 75 डॉलर मानी जा रही थी. युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 40% की बढ़ोतरी हो चुकी है. सोमवार को ब्रेंट तेल की कीमत पिछले तीन हफ्तों के हाई लेवल पर पहुंच गईं.
ईरान वॉर और सप्लाई चेन का संकट
तेल की कीमत बढ़ने की बड़ी वजह 28 फरवरी को ईरान पर हुआ हमला है. गोल्डमैन के एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस युद्ध की वजह से तेल की सप्लाई में जो रुकावट आई है, वो उम्मीद से ज्यादा लंबी हो सकती है. बैंक का अनुमान है कि खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई अब जून के आखिर तक ही ठीक तरह से शुरू हो पाएगी, जबकि पहले माना जा रहा था कि मई के बीच तक सब कुछ नॉर्मल हो जाएगा.
क्या $100 का आंकड़ा पार होगा?
गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार अगर हालात ऐसे ही रहते हैं और खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई जुलाई के आखिर तक भी ठीक से शुरू नहीं हुई, तो तेल काफी महंगा हो सकता है. ऐसी कंडीशन में चौथी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर) में ब्रेंट कच्चे तेल की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है.
बाजार का मूड
बाजार में सिर्फ बैंक ही नहीं, बल्कि तेल का कारोबार करने वाले लोग भी यही मान रहे हैं कि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी. फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के आंकड़े बताते हैं कि ब्रेंट क्रूड की कीमत $86 से $90 प्रति बैरल के बीच रह सकती हैं. युद्ध से पहले ये तेल सिर्फ $73 में मिलता था, लेकिन अब वो बीती बात हो चुकी है. गोल्डमैन सैक्स के अलावा, सिटी बैंक ने भी अपना अनुमान बदल दिया है. रॉयटर्स के अनुसार, सिटी ने 2026 की चौथी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड की कीमतों का अनुमान बढ़ाकर $80 प्रति बैरल कर दिया है. यानी बड़े बैंक अब मान रहे हैं कि आगे भी तेल सस्ता नहीं होने वाला.
आम आदमी और इकोनॉमी पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर सीधे आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा. पेट्रोल‑डीजल महंगे होने से ट्रक और गाड़ियों का खर्च बढ़ेगा. इसका असर सब्ज़ी, फल और रोजमर्रा के सामान पर पड़ेगा. फ्लाइट में इस्तेमाल होने वाला फ्यूल (ATF) महंगा होने से फ्लाइट के टिकट और महंगे हो सकते हैं. तीसरी बात रुपये को लेकर. भारत ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है. तेल महंगा होने पर डॉलर की जरूरत बढ़ेगी, जिससे रुपया गिर सकता है और महंगाई बढ़ सकती है.














