Gold-Silver, Copper-Aluminium Trading: सोने-चांदी की कीमतों ने हमेशा ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. जब भी सुरक्षित निवेश(Safe Haven) की बात आती है, तो आमतौर पर लोगों का ध्यान सोने और चांदी की चमक पर ही जाता है. आम तौर पर ग्लोबल टेंशन के बीच सोने-चांदी में खूब निवेश होता रहा है और इस दौरान कीमतें भी खूब बढ़ती हैं. लेकिन इस बार ऐसा कम देखा जा रहा. ऐसे में सोने-चांदी से इतर पीले और सफेद धातुओं की एक दूसरी जोड़ी ने लोगों का ध्यान खींचा है. मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन में आई बाधाओं के बीच 'बेस मेटल्स' (Base Metals) के बाजार में एक जबरदस्त तूफान देखा जा रहा है.
केडिया एडवायजरी के MD अजय सुरेश केडिया के अनुसार, पिछले एक महीने में कॉपर और एल्युमीनियम की कीमतों ने निवेशकों को चौंका दिया है. उन्होंने चार्ट एनालिसस कर बताया कि जहां कॉपर के दाम करीब 9% उछले हैं, वहीं एल्युमीनियम में भी 7.5% की शानदार बढ़त दर्ज की गई है.
NDTV के पाठकों-दर्शकों के लिए दिग्गज कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया ने जो बताया, हमने नीचे विस्तार से समझाया है. वो भी पढ़ लीजिएगा, पहले ये वीडियो देखिए.
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें, 3 बड़े कारण
बाजार में आई इस तेजी के पीछे अजय केडिया ने कई अहम मौलिक (Fundamental) कारण बताए हैं:
- चीन का एक्सपोर्ट बैन: दुनिया के सबसे बड़े मेटल कंज्यूमर चीन ने सल्फ्यूरिक एसिड के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया है. सल्फ्यूरिक एसिड कॉपर के उत्पादन में एक अहम भूमिका निभाता है, और इस प्रतिबंध ने सीधे तौर पर कॉपर की ग्लोबल सप्लाई को प्रभावित किया है.
- मिडिल ईस्ट का गणित: वैश्विक एल्युमीनियम उत्पादन में मध्य पूर्व (Middle East) की हिस्सेदारी करीब 9% है. जारी युद्ध और तनाव के कारण यह 9% की सप्लाई लाइन पूरी तरह बाधित होने की आशंका है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्लाई चेन को फिर से बहाल होने में कम से कम एक साल का समय लग सकता है.
- कमजोर डॉलर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स में आई गिरावट ने बेस मेटल्स को और मजबूती दी है, जिससे विदेशी खरीदारों के लिए ये धातुएं सस्ती और आकर्षक हो गई हैं.
कॉपर (Copper): 1280 के पार, अब आगे क्या?
एमसीएक्स (MCX) पर कॉपर इस वक्त 1280 के अहम स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है. केडिया का मानना है कि चीन में तांबे के अयस्क के आयात में आई 6.6% की वृद्धि और फैब्रिकेटर्स की बढ़ती खरीदारी इसे और ऊपर ले जा सकती है.
- सपोर्ट (Support): यदि कीमतों में मुनाफावसूली आती है, तो 1240 पहला और 1210 दूसरा मजबूत सपोर्ट लेवल है.
- रेजिस्टेंस (Resistance): ऊपर की ओर 1310 पर एक बड़ी बाधा है. यदि वॉल्यूम के साथ यह स्तर टूटता है, तो कॉपर 1345 तक की छलांग लगा सकता है.
एल्युमीनियम (Aluminium) 385 की ओर
एल्युमीनियम वर्तमान में 368 के आसपास कारोबार कर रहा है. इसके फंडामेंटल्स सप्लाई संकट के कारण बेहद मजबूत नजर आ रहे हैं.
- सपोर्ट: नीचे की तरफ 361 और 354 प्रमुख सपोर्ट जोन हैं.
- रेजिस्टेंस: कीमतों को 372 के स्तर पर कड़ा प्रतिरोध मिल रहा है. यदि कीमतें इस लेवल को पार कर होल्ड कर जाती हैं, तो यह जल्द ही 385 के पार जा सकता है.
जो नहीं जानते, वे समझ लें सपोर्ट-रेजिस्टेंस लेवल
आपने ऊपर पढ़ा और ये टर्म सुना भी जरूर होगा 'सपोर्ट' और 'रेजिस्टेंस' लेवल. जैसा कि अजय केडिया ने भी बताया, सपोर्ट ऐसा एक लेवल होता है जिसपे मार्केट में कभी भी जब गिरावट आती है तो जाकर रुकता है, और अगर अच्छे वॉल्यूम के साथ सपोर्ट टूट जाए तो प्राइसेस और नीचे की तरफ जा सकती हैं. ज्यादातर जो ट्रेडर्स हैं, वो ड्यूरिंग द डे सपोर्ट पे ध्यान रखते हैं कि ये सपोर्ट से मार्केट उठ रहा है या गिर रहा है.
ऐसे ही दूसरा टर्म है जिसको हम बोलते हैं 'रेजिस्टेंस'. रेजिस्टेंस एक ऐसा लेवल होता है कि भाव उसको तोड़ने में थोड़ा समय लगाता है. लेकिन वॉल्यूम के साथ अगर ये रेजिस्टेंस टूट जाए तो मार्केट और ऊंचे लेवल पे जा सकता है.
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निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
अजय केडिया के मुताबिक, हालांकि जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण मांग में थोड़ी अस्थिरता आ सकती है, लेकिन सप्लाई साइड की चिंताओं के चलते रुझान 'बुलिश' (तेजी का) बना रहेगा. ट्रेडर्स को सलाह दी गई है कि वे 'सपोर्ट' और 'रेजिस्टेंस' स्तरों को ध्यान में रखकर ही अपनी रणनीति बनाएं. यदि रेजिस्टेंस लेवल अच्छे वॉल्यूम के साथ टूटते हैं, तो बाजार में बड़ी तेजी की संभावना है.
(Disclaimer: मार्केट में निवेश, जोखिमों के अधीन है. यहां दी गई सूचनाएं केवल आपकी जानकारी बढ़ाने के उद्देश्य से लिखी गई हैं. एक्सपर्ट्स की राय से NDTV का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है. किसी भी तरह का निवेश करने से पहले अपने निवेश सलाहकार से सुझाव जरूर लें. )














