हवाई किराया 10 गुना ज्यादा, सामान कब तक पहुंचेगा, नहीं पता; मिडिल ईस्ट में संकट ने बढ़ाई एक्सपोर्टर्स की चिंता

मिडिल ईस्ट में संकट ने भारतीय एक्सपोर्टर्स की परेशानी बढ़ा दी है. उन्होंने सरकार से राहत पैकेज की मांग की है. साथ ही कुछ छूट भी मांगी है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
एक्सपोर्टर अनिल पेशावरी ने जताई चिंता.
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद मध्य पूर्व में बढ़े संकट से वैश्विक कारोबार पर गंभीर प्रभाव पड़ा है
  • मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण भारत से यूरोप तक एक्सपोर्ट में लगने वाला समय पहले के मुकाबले दोगुना हो गया है
  • समुद्री मार्ग पर शिपिंग किराया पांच गुना और एयर मार्ग का किराया दस गुना बढ़ने से आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

ईरान पर हमला कर अमेरिका और इजरायल ने जो जंग शुरू की थी, वह अब खतरनाक होती जा रही है. हफ्तेभर से ज्यादा बीत चुका है और जंग फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है. ईरान पर हमले के बाद पूरे मध्य पूर्व में बड़ा संकट खड़ा हो गया है. इससे वैश्विक कारोबार भी प्रभावित हो रहा है. इस बीच भारतीय एक्सपोर्टर्स ने सरकार से राहत पैकेज की मांग की है. उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध से अनिश्चितता का माहौल बन गया है.

एक्सपोर्टर्स को क्या दिक्कतें आ रहीं?

कपड़ा एक्सपोर्ट करने वाले अनिल पेशावरी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जंग शुरू होने से पहले भारत से यूरोप तक जहाज के जरिए एक्सपोर्ट का सामान भेजने में 23-24 दिन लगते थे. यूरोपीय खरीदार और भारतीय एक्सपोर्टर हिसाब लगाते थे कि उन्हें अपने स्टोर्स में सामान कब लगाना और भारत से कब सामान लेना है.

उन्होंने कहा कि पहले एक्सपोर्ट बिजनेस में एक स्थिरता होती थी किन इतने दिन में कंसाइनमेंट पहुंच जाएगा और कैलकुलेशन होती थी कि इतने दिन में स्टोर में लग जाएगा. लेकिन अब ये सबकुछ अस्थिर हो गया है. उन्होंने कहा कि आज मान लीजिए कि कस्टम में शिपमेंट हैंडओवर करते हैं तो वह यूरोप तक 40 दिन में पहुंचेगी और ग्राहकों तक 80 दिन में पहुंचेगी. ये बहुत बड़ी अनिश्चितता है.

संकट के बीच किराया भी कई गुना बढ़ा

अनिल पेशावरी ने कहा कि अभी हम अमेरिकी टैरिफ से उबर भी नहीं पाए थे और यह दूसरा संकट खड़ा हो गया है. समुद्री रूट की तुलना में एयर रूट का किराया 10 गुना ज्यादा है.

Advertisement

उन्होंने सरकार से मांग की कि उनका RoSCTL लाइसेंस 5 साल के लिए बढ़ाया जाए. उन्होंने बताया कि उनका RoSCTL लाइसेंस 31 मार्च 2026 को खत्म हो रहा है. हम चाहते हैं सरकार हमें सब्सिडी दे. उन्होंने कहा कि शिपिंग कंपनियों ने जहाज से एक्सपोर्ट का सामान पहुंचाने का किराया 5 गुना तक बढ़ा दिया है. हम चाहते हैं कि सरकार इसमें दखल दे और शिपिंग कंपनियों को किराया बढ़ाने से रोके.

क्या राहत मांग रहे एक्सपोर्टर्स?

मिडिल ईस्ट में संकट बढ़ने पर एक्सपोर्टर्स ने सरकार से राहत मांगी है. एक्सपोर्टर्स ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को एक चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने शिपिंग लाइन ग्राउंड रेंट और डिटेंशन चार्ज में छूट मांगी है. इसके साथ ही पोर्ट ग्राउंड रेंट और स्टोरेज चार्ज में छूट देने की मांग की गई है. इसके अलावा ओशन फ्रेट और सरचार्ज में राहत मांगी गई है.

Advertisement

एपेरेल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के चेयरमैन डॉ. ए. शक्तिवेल ने भी केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा है कि मध्य पूर्व में संकट से पैदा हुई फ्लाइट में रुकावटों की वजह से एक्सपोर्ट कार्गो पर डेमरेज चार्ज में छूट दी जाए.

Featured Video Of The Day
Sucherita Kukreti | Iran Israel War: अगर पीस डील फेल तो Trump किसको जिम्मेदार ठहराएंगे? | Mic On Hai