EPFO: कर्मचारी की मौत के बाद क्या बंद हो जाता है PF अकाउंट? जमा पैसे का क्या होगा, कौन कर सकता है क्लेम? ये रही पूरी डीटेल

EPFO के नियमों के मुताबिक, यदि किसी सदस्य का सर्विस के दौरान निधन हो जाता है, तो उनकी मृत्यु की तारीख से 3 साल बाद वह EPF खाता इनऑपरेटिव हो जाता है. रिटायरमेंट या मृत्यु के बाद भी ईपीएफ खाते पर 3 साल तक ब्याज मिलता रहता है.

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EPFO ने बताया है कि किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उनका अकाउंट कब 'इनऑपरेटिव' हो जाता है और परिवार वालों को पैसों के नुकसान से बचने के लिए क्या करना चाहिए.
नई दिल्ली:

EPF Death Claim Process: अगर किसी कर्मचारी की नौकरी के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या PF अकाउंट बंद हो जाता है, जमा पैसा मिलेगा या नहीं और क्लेम कौन कर सकता है. ऐसे मामलों को लेकर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने साफ नियम बताए हैं. इन नियमों के मुताबिक सदस्य की मृत्यु के बाद PF अकाउंट तुरंत बंद नहीं होता, लेकिन समय पर क्लेम नहीं किया गया तो अकाउंट इनऑपरेटिव हो सकता है. इसलिए परिवार या नॉमिनी के लिए सही समय पर जानकारी होना बेहद जरूरी है.

क्या सदस्य की मौत के बाद PF अकाउंट बंद हो जाता है?

EPFO के नियमों के मुताबिक, सदस्य की मौत के बाद PF अकाउंट तुरंत बंद नहीं होता. हालांकि अगर सदस्य की मृत्यु के बाद 3 साल तक खाते में कोई क्लेम नहीं किया जाता और कोई गतिविधि नहीं होती, तो खाते को इनऑपरेटिव मार्क कर दिया जाता है. इसलिए परिवार के लोगों को समय रहते क्लेम प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होता है.

मौत के बाद कितने समय तक PF अकाउंट पर ब्याज मिलता है?

EPFO के अनुसार, सदस्य की मृत्यु या रिटायरमेंट के बाद भी PF खाते पर 3 साल तक ब्याज मिलता रहता है. अगर इन 3 सालों के दौरान खाते से जुड़ा कोई क्लेम नहीं किया जाता, तो उसके बाद खाते को इनऑपरेटिव घोषित कर दिया जाता है और ब्याज मिलना बंद हो जाता है. इससे परिवार को आर्थिक नुकसान हो सकता है.

इनऑपरेटिव अकाउंट होने का क्या मतलब होता है?

इनऑपरेटिव अकाउंट का मतलब यह होता है कि खाते में कोई एक्टिविटी नहीं हो रही है और उस पर ब्याज मिलना बंद हो गया है. ऐसे अकाउंट में जमा पैसा सुरक्षित रहता है, लेकिन उस पर आगे ब्याज नहीं मिलता, इसलिए समय पर क्लेम करना जरूरी होता है.

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सदस्य की मौत के बाद PF का पैसा कौन क्लेम कर सकता है?

सदस्य की मृत्यु के बाद उसके PF खाते में जमा रकम को नॉमिनी, लाभार्थी या कानूनी वारिस क्लेम कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें EPFO कार्यालय में जरूरी दस्तावेज जमा करके निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है ताकि PF और पेंशन से जुड़ी राशि आसानी से मिल सके.

नौकरी के दौरान मौत होने पर कौन-कौन से फॉर्म भरने होते हैं?

अगर सदस्य की मृत्यु नौकरी के दौरान होती है, तो नॉमिनी, लाभार्थी या कानूनी वारिस को PF फाइनल सेटलमेंट के लिए Form 20, मासिक पेंशन के लिए Form 10D और EDLI इंश्योरेंस क्लेम के लिए Form 5IF भरना होता है. यह नियम उन मामलों में लागू होता है जहां सदस्य ने 58 साल से पहले या बाद में कम से कम 10 साल की पात्र सेवा पूरी की हो.

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अगर सदस्य ने 10 साल की सर्विस पूरी नहीं की हो तो क्या करना होगा?

अगर सदस्य की मृत्यु नौकरी के दौरान हुई हो और उसने 10 साल की पात्र सेवा पूरी नहीं की हो, तो ऐसी स्थिति में Form 20 और Form F जमा करना जरूरी होता है. इसके अलावा पेंशन निकासी के लिए Composite Claim Form (Aadhaar या Non-Aadhaar) के जरिए क्लेम किया जा सकता है

अगर सदस्य नौकरी से अलग होने के बाद उसकी मृत्यु हो जाती है, तो नॉमिनी, लाभार्थी या कानूनी वारिस Form 20 के जरिए PF का फाइनल सेटलमेंट और Form 10D के जरिए पेंशन क्लेम कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें जरूरी दस्तावेज EPFO कार्यालय में जमा करने होते हैं.

क्या परिवार को EDLI इंश्योरेंस का लाभ भी मिलता है?

अगर सदस्य की मृत्यु नौकरी के दौरान होती है, तो परिवार को EDLI यानी Employees' Deposit Linked Insurance योजना का लाभ भी मिल सकता है. इस लाभ को पाने के लिए नॉमिनी या परिवार को Form 5IF जमा करना जरूरी होता है.

परिवार के लिए समय पर क्लेम करना जरूरी 

EPFO के मुताबिक ,अगर सदस्य की मृत्यु के बाद 3 साल तक कोई क्लेम नहीं किया जाता, तो PF अकाउंट इनऑपरेटिव हो जाता है और उस पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है. इसलिए परिवार या कानूनी वारिस के लिए जरूरी है कि वे समय रहते क्लेम प्रक्रिया पूरी करें ताकि उन्हें किसी तरह का आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े.

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EPFO ने साफ तौर पर सलाह दी है कि सदस्य की मृत्यु के बाद परिवार या नॉमिनी को जरूरी दस्तावेज समय पर जमा करके क्लेम प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए. इससे PF सेटलमेंट, पेंशन और EDLI इंश्योरेंस से जुड़े सभी लाभ आसानी से मिल सकते हैं और परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है.

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