ड्रैगन की 'मनी पावर': 20 साल में दुनिया भर में बरसाए 1.5 ट्रिलियन डॉलर

China Global Investment Data: पिछले 20 सालों में चीन ने दुनिया भर में 1.5 ट्रिलियन डॉलर का निवेश किया है. अमेरिका और यूके जैसे देशों में भारी निवेश के बावजूद भारत में चीन का निवेश 2% से भी कम है.

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China Global Investment Data: पिछले दो दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की बात करें तो इसका चेहरा पूरी तरह बदल चुका है और इस बदलाव का गवाह बना है चीन. चीन की कंपनियों ने ना केवल प्रोडक्शन में बल्कि दुनिया भर में एफडीआई के मामले में तेजी लाई हैं. ऐसा हम अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट (AEI) के आंकड़ों को देखकर कह रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार पिछले 20 साल में चीन ने दुनियाभर के देशों में 1.5 ट्रिलियन डॉलर का तगड़ा निवेश किया है.

हैरानी की बात ये है कि चीन के निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा किसी विकासशील देश में नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका में गया है. आंकड़ों के अनुसार चीन ने अमेरिका में 204.1 बिलियन डॉलर का निवेश किया है. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ($108.1 बिलियन) और यूके ($106.6 बिलियन) का नंबर आता है.

China global investment data

दुनिया भर में चीनी निवेश का निवेश

  • अमेरिका-   $204.1 बिलियन
  • ऑस्ट्रेलिया-    $108.1 बिलियन
  • यूके-    $106.6 बिलियन
  • ब्राजील-    $78.9 बिलियन
  • स्विट्जरलैंड-    $62.9 बिलियन
  • कनाडा-    $57.3 बिलियन
  • जर्मनी-    $56.3 बिलियन
  • इंडोनेशिया-    $49.4 बिलियन
  • सिंगापुर-    $46.1 बिलियन
  • फ्रांस-    $37.1 बिलियन

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भारत में चीन के निवेश की स्थिति

जहां एक तरफ चीन दुनिया भर में पैसा पानी की तरह बहा रहा है, वहीं भारत के मामले में ये तस्वीर बिल्कुल उलट है. पिछले 20 सालों में भारत में चीन का निवेश सिर्फ 17.5 बिलियन डॉलर रहा है. ये चीन के टोटल ग्लोबल इन्वेस्टमेंट का 2% भी नहीं है. इसके अलावा चीन के निवेश के मामले में भारत 20वें नंबर पर आता है.

भारत में चीनी निवेश कम होने की अहम वजह

साल 2020 की गलवान घाटी की घटना के बाद भारत-चीन रिश्तों में कड़वाहट आई, जिसका सीधा असर व्यापारिक संबंधों पर पड़ा. इसके अलावा कड़े FDI नियम और देश में लोकल प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने वोकल फॉर लोकल की वजह से चीनी ऐप और कंपनियों को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा है.

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लोकल मार्केट पर असर

भारत के चीनी निवेश पर लगाम कसने का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू ये रहा कि भारतीय स्टार्टअप्स और लोकल ब्रांड्स को फलने-फूलने का मौका मिला है. इसके अलावा बदलती जियो-पॉलिटिक्स में एक देश का इतना ज्यादा निवेश होना आज के समय में ठीक नहीं कहा जा सकता है. हाल ही में टैरिफ वॉर में हम देख चुके हैं किस तरह से चीन ने अमेरिका के ऊपर भी बराबरी का रेसिप्रोकल टैरिफ लगा दिया था.

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