बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव का हाल ही में दिल्ली की तिहार जेल में सरेंडर करना इस बात का बड़ा सबूत है कि चेक बाउंस के मामलों को हल्के में लेना कितना भारी पड़ सकता है. 5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव को चेक बाउंस के पुराने मामले में सरेंडर करना पड़ा, क्योंकि बार-बार समय देने के बावजूद उन्होंने नियमों का पालन नहीं किया.ऐसे में ये जान लें कि बैंक के साथ पैसों के लेन-देन में छोटी सी लापरवाही आपको जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकती है.
जेल की सजा के साथ दोगुना जुर्माना देने का है नियम
अक्सर लोग बैंक की किश्त (EMI) या चेक बाउंस होने को मामूली दिक्कत समझते हैं, लेकिन कानून की नजर में यह एक बड़ा अपराध है. 'नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट' की धारा 138 के तहत, अगर आपका चेक बाउंस होता है और कानूनी नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर आप पेमेंट नहीं करते हैं, तो आपके खिलाफ आपराधिक मामला शुरू हो सकता है.
इस कानून के तहत आपको 2 साल तक की जेल हो सकती है या फिर चेक की रकम का दोगुना जुर्माना भरना पड़ सकता है. कई मामलों में जेल और जुर्माना दोनों की सजा एक साथ दी जाती है.
तुरंत लगने वाले बैंक चार्ज बिगाड़ सकते हैं आपका बजट
जैसे ही कोई चेक या ऑटो-डेबिट (SIP या EMI) फेल होता है, बैंक तुरंत 'डिसऑनर चार्ज' वसूलता है. यह चार्ज एक बार में 250 रुपये से लेकर 750 रुपये तक हो सकता है. अगर आपकी तीन-चार किस्तें एक साथ फेल होती हैं, तो सिर्फ बैंक चार्ज और पेनल्टी के रूप में ही आपको 2 से 3 हजार रुपये का एक्स्ट्रा बोझ सहना पड़ सकता है.
इसके अलावा बैंक लेट पेमेंट फीस और उस पर ब्याज भी वसूलता है, जो आपके कुल कर्ज को और बढ़ा देता है.
क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है बुरा असर, भविष्य में लोन मिलना होगा मुश्किल
पेमेंट फेल होने का सबसे बड़ा नुकसान आपके क्रेडिट स्कोर (CIBIL) को होता है. एक बार EMI बाउंस होने पर आपका क्रेडिट स्कोर गिर सकता है. बैंक तुरंत इसकी जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को देते हैं, जिससे आपकी प्रोफाइल 'डिफॉल्टर' की लिस्ट में आ जाती है. इसका सीधा मतलब यह है कि भविष्य में जब आप घर या कार के लिए बड़ा लोन लेने जाएंगे, तो या तो बैंक आपको लोन देने से मना कर देगा या फिर आपको बहुत ज्यादा ब्याज दर चुकानी पड़ेगी. एक छोटा सा बाउंस आपको मुसीबत में डाल सकता है.
सिर्फ पैसों की कमी नहीं, इन छोटी गलतियों से भी फेल होता है पेमेंट
हर बार पेमेंट सिर्फ बैंक में पैसे न होने की वजह से फेल नहीं होता. कई बार तकनीकी दिक्कत या आपकी छोटी गलतियों से भी ऐसा होता है. जैसे बैंक अकाउंट बंद कर देना, गलत अकाउंट डिटेल देना या बैंक बैलेंस की लिमिट को कम रखना. कभी-कभी सैलरी आने में एक दिन की देरी भी आपका पेमेंट बाउंस करा देती है. इसके अलावा अगर आपने बैंक में ऑटो-डेबिट की लिमिट कम रखी है और आपकी ईएमआई बढ़ गई है, तो भी ट्रांजैक्शन फेल हो जाएगा.
इन बातों का रखें ध्यान
अगर आपको पता है कि किसी महीने आपके खाते में पैसे कम हैं और चेक या ईएमआई बाउंस होने वाली है, तो सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने बैंक या कंपनी से पहले ही बात कर लें. उन्हें एडवांस में जानकारी देने से आप कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं. आप बैंक से 'पेमेंट हॉलिडे' या ईएमआई की तारीख बदलने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं. ऐसा करने से आपकी मंशा साफ रहती है और यह आपके बचाव में बड़ा काम आता है.














