केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) के दूसरे चरण के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट को मंज़ूरी दे दी है. इस मिशन की अवधि को 5 साल से बढ़ाकर 12 साल कर दिया है. इस कदम से भारत में एक मज़बूत घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने की कोशिशों को बल मिलने की उम्मीद है.
क्या है मकसद
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस नए आवंटन का मकसद भारत के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को तेज़ी देना है. साथ ही घरेलू चिप उत्पादन को मज़बूत करना है. इसके अलावा ग्लोबल निवेश को आकर्षित करना और सेमीकंडक्टर के आयात पर देश की निर्भरता को कम करना है. समय-सीमा बढ़ाने का मकसद चिप डिज़ाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग यूनिट्स में निवेश करने वालों को ज़्यादा पॉलिसी स्टेबिलिटी देना है.
ISM 1.0 के तहत, सरकार ने सेमीकंडक्टर बनाने के 12 प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी थी, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये का निवेश होना था. इन प्रोजेक्ट्स में एक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट और नौ पैकेजिंग फैसिलिटीज़ शामिल थीं.
ISM 2.0, जिसकी घोषणा सबसे पहले 2026-27 के केंद्रीय बजट में की गई थी, का फोकस पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन (चिप डिज़ाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग) पर रहने की उम्मीद है. साथ ही, यह सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट, मटीरियल और घरेलू इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा देगा.
सूत्रों के मुताबिक, मिशन की समय-सीमा को बढ़ाकर 12 साल करने का मकसद ग्लोबल और घरेलू निवेशकों को लंबे समय के लिए पॉलिसी से जुड़ी निश्चितता देना है, क्योंकि भारत ग्लोबल चिप सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहता है.
कैबिनेट के अन्य फैसले
कैबिनेट ने 62,500 करोड़ रुपये के बजट वाली एक नई मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को भी मंज़ूरी दी है.
कैबिनेट ने यूरिया सेक्टर के लिए एक नई निवेश नीति को मंज़ूरी दी है और साथ ही FY26 के लिए यूरिया सब्सिडी जारी रखने का फ़ैसला भी किया है.
इन फैसलों का मकसद घरेलू यूरिया उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को चालू वित्त वर्ष में सब्सिडी वाली दरों पर खाद मिलती रहे.
ISM 2.0 के लिए तय की गई रकम, मिशन के पहले चरण (जिसे दिसंबर 2021 में कैबिनेट ने मंज़ूरी दी थी) में आवंटित 76,000 करोड़ रुपये से काफी ज़्यादा है.
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