दुनिया का पहला बजट किसने पेश किया था. इसका उल्लेख ब्रिटेन (Great Britain) में मिलता है, जब दुनिया का पहला औपचारिक बजट सर रॉबर्ट डुपोल (Sir Robert Walpole) ने पेश किया था. सर रॉबर्ट डुपोल वोलपोल को ब्रिटेन का पहला वास्तविक (De Facto) प्रधानमंत्री कहा जाता है. वोलपोल ने 1733 में ब्रिटिश संसद में एक वित्तीय लेखाजोखा पेश किया था, जिसे विश्व का पहला आधुनिक औपचारिक बजट कहा जाता है. आइए जानते हैं कि विश्व का पहला बजट या भारत का पहला बजट किसने पेश किया था.
Bougette: बजट का इतिहास
ये सभी जानते होंगे कि बजट शब्द फ्रेंच वर्ड Bougette (बोजेत) से यानी चमड़े का छोटा थैला से आया है. वोलपोल ब्रिटिश संसद में सरकार की वित्तीय योजना पेश करने के लिए आर्थिक दस्तावेज एक चमड़े के बैग में रखकर लाए थे. वोलपोल ने अपना बैग खोला तो आलोचकों और अखबारों ने मजाक में कहा, The Budget has been opened यानी थैला खुल गया है. तभी से ये नाम वित्तीय दस्तावेजों के विवरण के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया.
वोलपोल ने एक्साइज बिल पेश किया
ब्रिटिश पीएम वोलपोल ने 1733 में एक्साइज बिल (Excise Bill) पेश किया था. इसका मकसद शराब और तंबाकू पर Tax की चोरी को रोकना और सरकार के खजाने को बढ़ाना था. तब उनके प्रस्ताव का तीखा विरोध हुआ था. लेकिन इसने दुनिया में वार्षिक वित्तीय योजना के विवरण के तौर पर बजट की नींव रख दी.
ग्लैडस्टोन का बजट
विलियम ग्लैडस्टोन (William Gladstone) ने 19वीं सदी में ब्रिटेन के चांसलर और प्रधानमंत्री ग्लैडस्टोन ने बजट को एक सालाना परंपरा और जनता की जवाबदेही का साधन बताया. उन्होंने बजट भाषण की कला को निखारा. विलियम ग्लैडस्टोन का 1853 का बजट इतिहास में सबसे यादगार माना जाता है. चांसल के तौर पर 1853 में जब ग्लैडस्टोन ने पहला बजट पेश कर ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को मुक्त व्यापार (Free Trade) की शुरुआत की और टैक्स सिस्टम को सरल बनाया.
आयकर (Income Tax) का रोडमैप
ग्लैडस्टोन वैसे तो आयकर के खिलाफ थे और युद्ध काल की आपात व्यवस्था मानते थे. उन्होंने 7 साल की योजना पेश कर 1860 तक आयकर को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा. लेकिन ब्रिटेन के लगातार युद्ध में फंसे होने से ऐसा नहीं हो सका. ग्लैडस्टोन ने करीब 250 वस्तुओं पर से आयात शुल्क (Customs Duty) को पूरी तरह खत्म कर दिया.
उत्तराधिकार कर (Succession Duty)
ग्लैडस्टोन ने पहली बार अचल संपत्ति (Real Estate) के उत्तराधिकार पर कर लगाया. इससे ब्रिटिश अमीर वर्ग पर टैक्स लगाया गया. उन्होंने चाय पर लगने वाले टैक्स को धीरे-धीरे कम करने का प्रस्ताव रखा, ताकि आम आदमी इसका इस्तेमाल कर सके.दर्जनों अन्य सामानों पर टैक्स घटा दिया. आम जनता के रोजमर्रा के उपभोग की वस्तुएं सस्ती हो गईं.
दुनिया का सबसे लंबा बजट भाषण
ब्रिटिश पार्लियामेंट में ग्लैडस्टोन का बजट भाषण लगभग 4 घंटे 45 मिनट तक चला था. ग्लैडस्टोन की भाषण शैली इतनी प्रभावशाली थी कि उन्होंने जटिल आंकड़ों को भी कहानी की तरह पेश किया. इसी बजट से उन्हें एक महान अर्थशास्त्री के तौर पर पहचान मिली. ग्लैडस्टोन के वित्तीय दर्शन (Gladstonian Finance) में सरकारी खर्च में भारी बचत करना, सरकार को कर्ज लेने से बचने और टैक्स को कम रखने के सिद्धांत के तौर पर जाना जाता है.
भारत का पहला बजट किसने पेश किया
भारत का पहला बजट ब्रिटिश काल में 7 अप्रैल 1860 को ईस्ट इंडिया कंपनी के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पेश किया था. भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को दबाने कुचलने में ब्रिटिश हुकूमत का काफी खजाना खाली हो गया था. इस संकट के बीच ब्रिटिश काउंसिल ने मशहूर अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन (James Wilson) को भारत भेजा. विल्सन द इकोनॉमिस्ट (The Economist) मैगजीन के संस्थापक भी थे.
पहली बार इनकम टैक्स लगाया
जेम्स विल्सन ने 7 अप्रैल 1860 को वायसराय की परिषद के सामने भारत का पहला बजट पेश किया. विल्सन ने पहली बार भारत में इनकम टैक्स लगाया गया. सालाना वार्षिक आय 200 रुपये से अधिक रखने वालों पर ये आयकर लगाया गया. सरकार का खर्च कम करने के लिए सेना के बजट में भारी कटौती का प्रस्ताव दिया गया.
लाइसें शुल्क के साथ नोट छापने पर मुहर
विल्सन ने बजट में लाइसेंस टैक्स और ड्यूटी का प्रस्ताव दिया. यानी व्यापार और व्यवसायों पर लाइसेंस शुल्क लगाया गया. दूसरे देशों से आयात की वस्तुओं पर सीमा शुल्क (Customs Duty) को बेहतर किया गया. कागजी मुद्रा (Paper Currency) ने भारत में पहली बार औपचारिक तौर पर कागजी मुद्रा प्रणाली यानी नोट छापने की नींव रखी.
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भारतीय बजट का जनक
जेम्स विल्सन को भारतीय बजट का जनक (Father of Indian Budget) कहा जाता है. विल्सन इस क्रांतिकारी बजट के बाद अपना काम पूरा करने के कुछ महीनों बाद अगस्त 1860 में पेचिश के शिकार हो गए और कोलकाता में चल बसे.
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