- आर्थिक सर्वे भारत सरकार का अहम दस्तावेज है जो पिछले 12 महीनों की आर्थिक प्रगति की रिपोर्ट होता है
- यह दस्तावेज मुख्य आर्थिक सलाहकार की निगरानी में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों का विभाग तैयार करता है
- आर्थिक सर्वे बजट से एक दिन पहले संसद में पेश किया जाता है और आगामी बजट की रूपरेखा का संकेत देता है
Budget 2026: 1 फरवरी का इंतजार पूरा देश कर रहा है क्योंकि उस दिन वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण खर्च और आय का ब्यौरा सामने रखेंगी. जब भी देश का बजट आने वाला होता है, उससे ठीक एक दिन पहले संसद में एक अहम डॉक्यूमेंट सभी के सामने रखा जाता है, जिसे हम इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) या आर्थिक समीक्षा कहते हैं. ऐसा कहा जा सकता है कि अगर बजट आने वाले साल का प्लान है, तो इकोनॉमिक सर्वे पिछले साल का प्रोग्रेस रिपोर्ट है.
क्या है इकोनॉमिक सर्वे?
आसान भाषा में कहें तो यह भारत सरकार का सबसे फुलप्रूफ डॉक्यूमेंट है. इसे मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) की देखरेख में वित्त मंत्रालय का आर्थिक मामलों का विभाग तैयार करता है. इसमें जानकारी होती है कि बीते 12 महीनों में देश की अर्थव्यवस्था ने कैसी बल्लेबाजी की.कहां चौके-छक्के लगे और कहां हम क्लीन बोल्ड हुए.
बजट से पहले इसकी अहमियत क्यों?
बजट और इकोनॉमिक सर्वे का रिश्ता कुछ ऐसा है जैसे फिल्म से पहले उसका ट्रेलर. यह बताता है कि सरकार ने पिछले बजट में जो वायदे किए थे, वे कितने पूरे हुए. इसमें अगले साल के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया जाता है, जिससे निवेशकों और आम जनता को संकेत मिलता है कि देश के विकास की स्पीड क्या रह सकती है. यह सिर्फ एक डेटा नहीं देता, बल्कि सरकार को सुझाव भी देता है कि किन सेक्टर्स को बूस्ट की जरूरत है, जिसमें एग्रीकल्चर, न्युफैक्चरिंग और सर्विस शामिल है.
इस बार सर्वे की खास बातें
इनॉमिक सर्वे में कुछ चीजें हमेशा हेडलाइन बनती हैं. मसलन देश में खाने-पीने की चीजों और तेल की कीमतों पर राय क्या है. इसके अलावा नौकरी के मोर्चे पर देश कहां खड़ा हुआ है. सबसे बड़ी बात कि राजकोषीय घाटा कितना है, यानी कमाई और खर्च के बीच कितना अंतर है.
आपके लिए क्यों है जरूरी?
अगर आप जानना चाहते हैं कि आपकी जेब पर आने वाले समय में क्या असर पड़ने वाला है, तो इकोनॉमिक सर्वे पर नजर जरूर रखें. यह वही नींव है जिस पर अगले दिन बजट की इमारत खड़ी की जाती है.














