8th Pay Commission Latest News Today 2026: 8वें वेतन आयोग के इंतजार में बैठे लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. अगर आप भी इस उलझन में हैं कि नए वेतन आयोग में आपकी सैलरी कितनी बढ़ेगी, तो अब इसकी तस्वीर थोड़ी साफ होने लगी है. हालांकि, सरकार की ओर से अभी आधिकारिक ऐलान होना बाकी है, लेकिन महंगाई के ताजा आंकड़ों ने यह इशारा कर दिया है कि नई सैलरी तय करने वाला 'फिटमेंट फैक्टर' कम से कम कितना होगा...
क्या है फिटमेंट फैक्टर का पूरा गणित?
सोशल मीडिया और कर्मचारी यूनियनों के बीच इन दिनों '1.60 फिटमेंट फैक्टर' की काफी चर्चा है. इसे आसान भाषा में समझें तो जब भी नया वेतन आयोग आता है, तो आपकी पुरानी बेसिक सैलरी को एक खास नंबर से गुणा किया जाता है ताकि नई सैलरी तय हो सके.
आसान भाषा में कहें तो 'फिटमेंट फैक्टर' एक ऐसा नंबर (मल्टीप्लायर) है जिससे आपकी पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है. उदाहरण के लिए, 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था. यानी अगर किसी की बेसिक सैलरी ₹7,000 थी, तो उसे 2.57 से गुणा कर ₹18,000 कर दिया गया था.
अगर 1.60 का न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर आधार माना जाता है, तो भी सैलरी में बढ़ोतरी तय है. लेकिन अगर सरकार 7वें वेतन आयोग की तरह इसे 2.57 या उससे ज्यादा रखती है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर ₹34,000 से ₹51,000 के बीच पहुंच सकती है.
फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का सीधा फायदा पेंशनर्स को भी मिलता है. उनकी मूल पेंशन को भी इसी फैक्टर से गुणा किया जाएगा, जिससे मासिक पेंशन में भारी इजाफा होगा.
DA में 2% की बढ़ोतरी की पूरी संभवना
दिसंबर 2025 के महंगाई आंकड़ों (CPI-IW) के अनुसार, जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते (DA) में 2% की बढ़ोतरी पक्की हो गई है. इसके साथ ही अब कुल डीए 60% पहुंच जाएगा. नियम के हिसाब से, यदि आपकी बेसिक सैलरी 100 रुपये है और उस पर 60 रुपये महंगाई भत्ता मिल रहा है, तो आपकी कुल वैल्यू 160 हो जाती है. यही वजह है कि जानकार कह रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर 1.60 से कम तो हो ही नहीं सकता, क्योंकि यह महंगाई के हिसाब से आपका हक बन चुका है.
1.60 के आंकड़े का क्या मतलब है?
भले ही आंकड़ों के हिसाब से 1.60 का आधार (Base) बन गया हो, लेकिन असलियत में फिटमेंट फैक्टर इससे काफी ऊपर जा सकता है. इसके पीछे दो बड़े कारण हैं. पहला यह कि कोरोना काल (2020-21) के दौरान सरकार ने 18 महीने का डीए फ्रीज कर दिया था, जो कर्मचारियों को कभी वापस नहीं मिला. अगर वह पैसा जोड़ा जाए, तो डीए आज 60% से कहीं ज्यादा होता.
दूसरा कारण यह है कि वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में समय लगता है. जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग भले ही माना जा रहा हो, लेकिन इसे पूरी तरह लागू होने में करीब दो साल लग सकते हैं. इस बीच डीए की चार और किस्तें बढ़ेंगी, जिससे यह आंकड़ा 80% से 90% तक पहुंच सकता है. ऐसी स्थिति में फिटमेंट फैक्टर 1.9 या 2 के करीब पहुंच सकता है. हालांकि, कर्मचारी यूनियन इसकी मांग 2.86 से 3.25 तक कर रहे हैं, ताकि सैलरी में सम्मानजनक बढ़ोतरी हो सके.
पिछले वेतन आयोगों में कितनी बढ़ी थी सैलरी?
अगर हम पुराने रिकॉर्ड देखें, तो हर बार कर्मचारियों को मोटा फायदा मिला है. 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.92 था, जिससे न्यूनतम सैलरी 7,440 रुपये हुई थी. वहीं, 7वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.57 कर दिया गया, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी सीधे 18,000 रुपये पहुंच गई. यही कारण है कि इस बार भी कर्मचारियों की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं.
फिटमेंट फैक्टर को लेकर कब होगा अंतिम फैसला?
फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, इसका आखिरी फैसला सरकार अपनी आर्थिक स्थिति और कर्मचारियों की मांग को देखकर लेगी.हालांकि 1.60 का आंकड़ा अब पक्का माना जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों की मांग है कि इसे 2.86 से ऊपर रखा जाए. फिलहाल यह फैसला सरकार के हाथ में है और मार्च 2026 तक कैबिनेट की बैठक में इस पर बड़ी अपडेट आने की संभावना है.














