NDTV क्रिएटर्स मंच पर आयोजित एक विशेष सत्र में प्रसिद्ध गीतकार और लेखक प्रसून जोशी ने शिरकत की. वह 'रंग दे बसंती', 'तारे जमीन पर', 'दिल्ली-6' और 'भाग मिल्खा भाग' जैसी फिल्मों के लिए यादगार गीत और पटकथा लिखने के लिए जाने जाते हैं. यहां उन्होंने अपनी लेखनी, संवेदनाओं और कविताओं पर चर्चा की. यह कहे जाने पर कि उनके शब्दों ने मां, बचपन और समाज की मासूमियत को आवाज दी है. प्रसून जोशी ने कहा, उनकी कविताओं और गीतों में हमेशा दिल का उपयोग प्राथमिकता पर होता है.
दिल्ली और जीवन से प्रेरणा
उन्होंने यहां दिल्ली और पहाड़ी जीवन के अनुभव साझा किए. उनके अनुसार, दिल्ली में विरोधाभास और विविधता अनुभव की चीज है, जिसे केवल महसूस किया जा सकता है. वहीं पहाड़ों की जीवनशैली ने उन्हें संघर्ष और विश्वास करना सिखाया. प्रसून ने अपनी नानी और मां से मिले जीवन के सबक साझा किए, जिनसे उन्होंने मेहनत, संघर्ष और पारदर्शिता के मूल्य सीखे. उन्होंने कहा कि यही सब उनके गीतों और कविताओं में झलकता है.
गीतों और फिल्मों में योगदान
प्रसून जोशी ने बताया कि उनकी लेखनी ने अनेक फिल्मों और अभियानों को नई दिशा दी है. उन्होंने 'भाग मिल्खा भाग', 'रंग दे बसंती', और 'पल्स पोलियो' जैसे अभियानों में अपनी रचनात्मकता और सोच दिखाई. उन्होंने कहा, "जब मैं प्रेम या मातृत्व पर गीत लिखता हूं, तो इसे केवल शब्दों में नहीं, बल्कि अनुभव और भावनाओं में जीता हूं."
संगीत और पहाड़ी जीवन का योगदान
प्रसून ने अपने पहले गीत लिखे जाने की कहानी भी शेयर की. उन्होंने कहा कि उनका पहला गीत, पहाड़ी महिलाओं के लिए लिखा गए ट्रिब्यूट की वजह से मिला. उस गीत को सुनकर अमिताभ बच्चन ने उन्हें पत्र लिखा था. वही गीत सुनकर उन्हें 2001 में फिल्म लज्जा का गीत लिखने का ऑफर मिला. लज्जा से पहले वह शुभा मुदगल के प्रसिद्ध एल्बम 'अब के सावन' और 'मन के मंजीरे' (Mann Ke Manjheere) के लिए गाने लिख चुके थे. जब अमिताभ बच्चन ने 'मन के मंजीरे' के बोल सुने, तो वह काफी प्रभावित हुए. फिर उन्होंने निर्देशक राजकुमार संतोषी से प्रसून जोशी की सिफारिश की. इसके बाद उन्हें लज्जा में लिखने का मौका मिला.
उन्होंने बताया कि पहाड़ों की जीवनशैली और मेहनतकश महिलाएं उनके लेखन में हमेशा प्रेरणा का स्रोत रही हैं. उन्होंने मंच पर बताया कि नदी, धूप और छांव से भी उन्हें लेखन में प्रेरणा मिलती है. "धूप-छांव का खेल, नदी की आवाज और पहाड़ों की ठंडक मेरे गीतों और कविताओं में झलकती है." उन्होंने कहा, जीवन और कला का संबंध अनुभव और दिल से जुड़ा है, और यही उनकी लेखनी की ताकत है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रचनात्मकता
मंच पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर भी चर्चा हुई. प्रसून ने कहा कि AI केवल पहले से लिखे गए डेटा पर काम कर सकता है, लेकिन पहली बार अनुभव की गई भावनाओं और अनभूत सत्य को वह नहीं समझ सकता. उन्होंने कहा, "सबसे सुंदर गीत अभी लिखा जाना बाकी है. AI के पास वह नहीं है, जो अनुभव और पहली बार महसूस किया गया सत्य है."
AI कभी इंसान की जगह नहीं ले सकता
गीतकार ने कहा कि एआई को हल्के में नहीं लिया जा सकता, लेकिन यह भी सच है कि यह कभी इंसानों की जगह नहीं ले सकता. एआई पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा, मां और बच्चे के बीच का प्यार एक ऐसी भावना है जिसे डेटा और AI समझ नहीं सकते. "यदि कोई पूछे कि आप अपनी मां से क्यों प्यार करते हैं, तो उसका जवाब केवल दिल और अनुभव से ही समझा जा सकता है. AI इसे टुकड़ों में काटकर नहीं समझ सकता." मानव संवेदनाएं और अनुभव किसी भी तकनीक से मापे नहीं जा सकते.
छूना और स्पर्श जैसे अनुभव AI की पहुंच से बाहर
भावनाओं और प्रेम की गहराई केवल पहली बार महसूस किए गए अनुभवों से आती है. उन्होंने कहा, "जीवन का सत्य वही है जो आपने स्वयं अनुभव किया हो."
साहित्य, कविता और आध्यात्मिकता का कनेक्शन
उन्होंने आगे कहा, लेखन और कविता केवल दिमाग से नहीं, बल्कि स्पिरिचुअल कनेक्शन और अनुभव से जन्म लेती है. "जब मैं प्रेम या दर्द लिखता हूं, तो मुझे लगता है कि यह किसी आध्यात्मिक स्तर से मेरे पास आता है और फिर शब्द बनता है. AI के पास यह अनुभव और गहराई नहीं है." उन्होंने कबीर का शेर बोलते हुए कहा, "प्रेम गली अति सांकरी तामे दो न समाहिं" – यह प्रेम का वह विचार है, जिसे AI कभी व्यक्त नहीं कर सकता.
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