जिम्मी शेरगिल और दिव्या दत्ता स्टारर फिल्म “तुम रहे ना तुम” का वर्ल्ड प्रीमियर 10 अक्टूबर को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ साउथ एशिया (IFFSA) टोरंटो में होगा. फिल्म का प्रीमियर गाला स्क्रीनिंग के तौर पर मिसिसॉगा के सिनेप्लेक्स सिनेमाज कोर्टनी पार्क में किया जाएगा. प्रेम प्रकाश मोदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक मनोवैज्ञानिक पारिवारिक ड्रामा है. फिल्म में जिम्मी शेरगिल और दिव्या दत्ता मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि तनिष्का तिवारी, हर्ष छाया, जरीना वहाब और राजेश जैस अहम किरदारों में नजर आएंगे.
नाटक “द फादर” से प्रेरित फिल्म
फिल्म की पटकथा राकेश कुमार त्रिपाठी ने लिखी है. विक्रमजीत रॉय इसके एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं, जबकि दीपांकर “जोजो” चाकी एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के साथ फिल्म के साउंड डिजाइनर भी हैं. फिल्म का निर्माण विन्नी चावला, डॉ. वृंदा चावला और सोनू कटियाल ने फैनैटिकली फिल्मी प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले किया है.
“तुम रहे ना तुम” स्वीडिश नाटककार ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग के चर्चित नाटक “द फादर” से प्रेरित है. कहानी को भारतीय पारिवारिक परिवेश में रखा गया है और उत्तराखंड के एक पहाड़ी शहर की पृष्ठभूमि में एक पति-पत्नी के बीच अपनी बेटी के भविष्य को लेकर शुरू हुए टकराव को दिखाया गया है. धीरे-धीरे यह विवाद सिर्फ बेटी के फैसले तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार के भीतर सत्ता, पहचान, भरोसे और रिश्तों को लेकर गहरे संघर्ष में बदल जाता है.
बच्चे की भविष्य पर सवाल
फिल्म परिवार और रिश्तों के जरिए यह सवाल भी उठाती है कि आखिर किसी बच्चे के भविष्य को तय करने का अधिकार किसके पास होना चाहिए. कहानी में पितृसत्ता, असुरक्षा, विरासत और माता-पिता की अपेक्षाओं के साथ-साथ उन भावनात्मक जख्मों को भी जगह दी गई है, जो लंबे समय में रिश्तों को प्रभावित करते हैं. फिल्म किसी एक किरदार को पूरी तरह सही या गलत ठहराने के बजाय दो ऐसे लोगों के बीच के संघर्ष को सामने रखती है, जिनकी अपनी कमियां और असुरक्षाएं हैं.
IFFSA टोरंटो के जरिए फिल्म भारत से बाहर
फिल्म के वर्ल्ड प्रीमियर को लेकर जिम्मी शेरगिल ने कहा, “तुम रहे ना तुम” की शुरुआत IFFSA टोरंटो में वर्ल्ड प्रीमियर के साथ होना मेरे लिए बेहद खास है. कहानी एक भारतीय परिवार से जुड़ी है, लेकिन इसमें मौजूद भावनाएं सार्वभौमिक हैं. मुझे उम्मीद है कि भाषा और भौगोलिक सीमाओं से परे यह फिल्म लोगों से जुड़ पाएगी.
निर्देशक प्रेम प्रकाश मोदी ने कहा कि एक सदी से भी पहले लिखी गई कहानी का आज भी प्रासंगिक महसूस होना अपने आप में खास है. उन्होंने उम्मीद जताई कि IFFSA टोरंटो के जरिए फिल्म भारत से बाहर के दर्शकों तक भी पहुंचेगी.
वहीं, दिव्या दत्ता ने कहा कि परिवार, प्यार और उम्मीदों को लेकर हर संस्कृति में अपनी समानताएं होती हैं. उनके मुताबिक, फिल्म में रिश्तों को जिस तरह से दिखाया गया है, उसमें दुनिया भर के दर्शक अपनी जिंदगी की कोई न कोई झलक देख सकते हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं