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रणवीर सिंह, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल नहीं धुरंधर की असली स्टार है ये एक्ट्रेस, छोटे से रोल से जीत लिया सबका दिल

फिल्म 'धुरंधर 2: द रिवेंज' बॉक्स ऑफिस पर 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार कर चुकी है. इस भव्य फिल्म में बड़े-बड़े सितारे हैं, लेकिन असली तारीफ एक छोटी सी कलाकार को मिल रही है. नाम है अहीदा सरमई.

रणवीर सिंह, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल नहीं धुरंधर की असली स्टार है ये एक्ट्रेस, छोटे से रोल से जीत लिया सबका दिल
रणवीर सिंह, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल नहीं धुरंधर की असली स्टार है ये एक्ट्रेस

फिल्म 'धुरंधर 2: द रिवेंज' बॉक्स ऑफिस पर 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार कर चुकी है. इस भव्य फिल्म में बड़े-बड़े सितारे हैं, लेकिन असली तारीफ एक छोटी सी कलाकार को मिल रही है. नाम है अहीदा सरमई. डाउन सिंड्रोम होने के बावजूद अपनी मासूम अदाकारी से उन्होंने सबके दिल जीत लिए हैं. अहीदा ने फिल्म में अर्जुन रामपाल की बेटी का किरदार निभाया है. उनकी परफॉर्मेंस इतनी सच्ची और भावुक थी कि कई अनुभवी कलाकारों को भी पीछे छोड़ गई. निर्देशक आदित्य धर की इस एक्शन फिल्म में अहीदा की मासूमियत ने पूरी कहानी में खास जगह बनाई.

काफी टैलेंडेट है अहीदा सरमई

हाल ही में मुंबई में फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग हुई. स्क्रीनिंग के बाद पार्टी में रणवीर सिंह, अर्जुन रामपाल, सारा अर्जुन और निर्देशक आदित्य धर जैसे लोग अहीदा के पास पहुंचे. रणवीर सिंह ने उन्हें गले लगाकर उनकी तारीफ की. अर्जुन रामपाल, जो फिल्म में उनके पिता बने थे, उनसे खास लगाव दिखाया. यह प्यार और सराहना अहीदा की मेहनत का सबसे बड़ा इनाम बन गया. अहीदा सिर्फ अभिनेत्री नहीं हैं. वे थिएटर आर्टिस्ट और पेंटर भी हैं. उन्होंने 'रामायण', 'आशा की किरण' और 'वो खुला आसमान' जैसे नाटकों में स्टेज पर शानदार परफॉर्मेंस दी है. उनकी पेंटिंग्स राष्ट्रपति भवन और मुंबई के एनसीपीए में प्रदर्शित हो चुकी हैं. इससे पहले वे 'मक्तूब' और 'बेबाक' जैसी शॉर्ट फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं.

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इन क्षेत्र में कमा चुकी हैं नाम

2022 में वे मिस इंडिया (डाउन सिंड्रोम) की रनर-अप रहीं. 2024 में मिस दिल्ली (स्पेशल चिल्ड्रन) में भी दूसरा स्थान हासिल किया. अहीदा की इस यात्रा के पीछे उनके माता-पिता का अटूट साथ है. उन्होंने हमेशा यह कोशिश की कि अहीदा को हर वह मौका मिले जो दूसरे बच्चों को मिलता है. अहीदा की कहानी समावेशिता की मिसाल है. यह बताती है कि सही सपोर्ट और जुनून से कोई भी चुनौती रुकावट नहीं बन सकती. डाउन सिंड्रोम जैसी स्थिति को उन्होंने अपनी ताकत बनाया और आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं.

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