New Year Shayari: 'पिछला बरस तो खून रुला कर गुजर गया. क्या गुल खिलाएगा ये नया साल दोस्तो- पढ़ें चुनिंदा शायरी

New Year Shayari: फ़ारूक़ इंजीनियर का एक शेर है, ''इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ, लो साथ छोड़ने लगा आख़िर ये साल भी.' बस कुछ ऐसा ही मिजाज 2020 (Goodbye 2020) के जाने और 2021 (Welcome 2021) के आने का भी है.

New Year Shayari: 'पिछला बरस तो खून रुला कर गुजर गया. क्या गुल खिलाएगा ये नया साल दोस्तो- पढ़ें चुनिंदा शायरी

New Year Shayari: नए साल पर उर्दू की चुनिंदा शायरी

नई दिल्ली:

New Year Shayari: फ़ारूक़ इंजीनियर का एक शेर है, ''इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ, लो साथ छोड़ने लगा आख़िर ये साल भी.' बस कुछ ऐसा ही मिजाज 2020 (Goodbye 2020) के जाने और 2021 (Welcome 2021) के स्वागत को लेकर भी कहा जा सकता है. 2020 में जहां कोरोना महामारी ने पूरे जमाने को दहशत में और घरों बंद रखा, वहीं 2021 (Happy New Year 2021) के शुभ और मुबारक होने की दुआ मांगी जा रही है. हम अब भी कोरोना वायरस महामारी से जंग लड़ रहे हैं, और मुसीबत अब भी सिर में मंडरा रही है. ऐसे माहौल में नए साल की मुबारकबाद के साथ कुछ ऐसे शेर जो नए साल और नए साल (New Year Shayari) की बधाई दोनों को बखूबी बयान करते हैं. पढ़ें नए साल की शायरी....

ऐ जाते बरस तुझ को सौंपा ख़ुदा को 
मुबारक मुबारक नया साल सब को 
मोहम्मद असदुल्लाह

जिस बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है 
उस को दफ़नाओ मिरे हाथ की रेखाओं में 
क़तील शिफ़ाई

इस गए साल बड़े ज़ुल्म हुए हैं मुझ पर 
ऐ नए साल मसीहा की तरह मिल मुझ से 
सरफ़राज़ नवाज़

इक साल गया इक साल नया है आने को 
पर वक़्त का अब भी होश नहीं दीवाने को 
इब्न-ए-इंशा

न शब ओ रोज़ ही बदले हैं न हाल अच्छा है 
किस बरहमन ने कहा था कि ये साल अच्छा है 
अहमद फ़राज़

कुछ ख़ुशियाँ कुछ आँसू दे कर टाल गया 
जीवन का इक और सुनहरा साल गया 
अज्ञात

तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई 
वर्ना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई 
फ़ैज़ लुधियानवी

यकुम जनवरी है नया साल है 
दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है 
अमीर क़ज़लबाश

पिछ्ला बरस तो ख़ून रुला कर गुज़र गया 
क्या गुल खिलाएगा ये नया साल दोस्तो 
फ़ारूक़ इंजीनियर


करने को कुछ नहीं है नए साल में 'यशब' 
क्यों ना किसी से तर्क-ए-मोहब्बत ही कीजिए 
यशब तमन्ना

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देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़ 
इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है 
मिर्ज़ा ग़ालिब