विज्ञापन

नकली ज्वेलरी की दुकान पर काम करते थे एकता कपूर के पिता जितेंद्र, पहली फिल्म के लिए कूद गए थे ऊंट पर, सैलरी में कमाए सिर्फ 100 रुपये

जितेंद्र ने कभी नहीं सोचा था कि वे फिल्मों में काम करेंगे, लेकिन पैसे कमाने और पहचान बनाने की चाह में अभिनेता ने बॉडी डबल के साथ हिंदी सिनेमा में कदम रखा था

नकली ज्वेलरी की दुकान पर काम करते थे एकता कपूर के पिता जितेंद्र, पहली फिल्म के लिए कूद गए थे ऊंट पर, सैलरी में कमाए सिर्फ 100 रुपये
नकली ज्वेलरी की दुकान पर काम करते थे एकता कपूर के पित जितेंद्र

हिंदी सिनेमा में पहचान बनाने के लिए सभी को दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है. किसी भी नए अभिनेता को पहली फिल्म मिलना किस्मत के चमक जाने के जैसा होता है, लेकिन जितेंद्र के लिए यह घाटे का सौदा रहा था.  150 रुपए से फिल्मों में कदम रखने वाले जितेंद्र ने कभी नहीं सोचा था कि वे फिल्मों में काम करेंगे, लेकिन पैसे कमाने और पहचान बनाने की चाह में अभिनेता ने बॉडी डबल के साथ हिंदी सिनेमा में कदम रखा था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहली बतौर मुख्य अभिनेता फिल्म पाने के लिए जितेंद्र ने कितने पापड़ बेले थे?

नकली ज्वेलरी बेचते थे जितेंद्र के पिता

7 अप्रैल 1942 को जन्मे जितेंद्र के पिता की नकली ज्वेलरी की दुकान थी, जो फिल्मों के सेट पर भी अपने नकली गहने बेचा करते थे. जितेंद्र भी अपने पिता के काम में हाथ बांटते थे. वे बचपन से ही फिल्मों के शौकीन थे लेकिन नहीं पता था कि गहने बेचने का काम ही हिंदी सिनेमा में कदम रखने का पहला रास्ता है. अभिनेता के करियर की शुरुआत भले ही 'गीत गाया पत्थरों ने' से हुई थी लेकिन उससे पहले वो फिल्म 'सेहरा' पर काम कर चुके थे और इसी फिल्म में अभिनेता की बहादुरी और लगन देखने के बाद निर्देशक वी. शांताराम ने जितेंद्र को पहली बतौर मुख्य अभिनेता फिल्म ऑफर की थी.

ये भी पढ़ें: Dhurandhar: सच में कसाईनुमा मौत देता था रहमान डकैत? पाकिस्तान के ल्यारी पर करता था राज

Latest and Breaking News on NDTV

150 रुपये तनख्वाह

बहुत कम लोग जानते हैं कि जितेंद्र ने फिल्म 'सेहरा' के सेट पर हर तरीके का काम किया था. वे आर्टिस्ट का सारा काम करते थे और उनकी जरूरतों का ध्यान भी रखते थे. उस वक्त एक महीने की तनख्वाह 150 रुपए थी. इसी फिल्म के दौरान अभिनेता ने वी. शांताराम को प्रभावित करने के लिए चापलूसी की सारी हदें पार कर दी थीं. खुद अभिनेता ने स्वीकारा था कि निर्देशक को इम्प्रेंस करने के लिए वो सेट पर चापलूसी करने से भी पीछे नहीं हटते थे.

Latest and Breaking News on NDTV

ऊंट पर छलांग लगा दी

उन्होंने बताया कि एक बार फिल्म में अभिनेत्री संध्या को एक सीन करना था, जिसमें ऊंट पर कूदना था. निर्देशक ऐसे शख्स की तलाश में थे, जो यह सीन कर सके और बिल्कुल संध्या जैसा दिखे. वी. शांताराम को इम्प्रेस करने के लिए अभिनेता ने सीन को करने के लिए हां कर दिया और ऊंट पर छलांग लगा दी. वो सीन सिर्फ पैसे के लिए नहीं किया था, बल्कि खुद को साबित करने के लिए किया था, जिसके बाद निर्देशक ने फिल्म 'गीत गाया पत्थरों ने' में लीड रोल दिया और तनख्वाह थी 100 रुपए. अभिनेता ने बताया कि इस वक्त पैसे से फर्क नहीं पड़ता था, क्योंकि जितेंद्र को जितेंद्र बनाने वाले वी. शांताराम थे और उनकी की बदौलत सिनेमा में कदम रखा था.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com