बारह साल पहले, एक ऐसी फिल्म आई जिसने भारतीय सिनेमा में प्यार की भाषा बदल दी. रांझणा सिर्फ एक कहानी नहीं थी. यह एक ऐसा एक्सपीरियंस था जो बनारस की संकरी गलियों से गुजरा और दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बस गया. आज जब हम 'रांझणा' के 12 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, तो उन पलों को फिर से याद किए बिना नहीं रहा जा सकता है जिन्होंने इसे खास बनाया, और ऐसा ही एक सीन गंगा घाट की हलचल, भावना और एक मौन चमत्कार से पैदा हुआ था.
निर्देशक आनंद एल राय, जो साधारण से असाधारण निकालने की कला में माहिर हैं, उन्होंने हाल ही में फिल्म के एक अत्यंत भावुक दृश्य के पीछे की कहानी साझा की — वह क्षण जब बड़ा कुंदन अपने बचपन के कुंदन से मिलता है. यह दृश्य स्क्रिप्ट में पहले से नहीं था लेकिन फिल्म के इमोश्नल क्लाइमेक्स का सबसे यादगार सीन बन गया.
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आनंद बताते हैं: "भावना स्क्रिप्ट में हमेशा से थी, लेकिन उसका दृश्य नहीं. उस दिन हिमांशु (शर्मा) और मैं झगड़ रहे थे. मुझे क्लाइमैक्स का हिस्सा अब तक नहीं मिला था, और वह बनारस में हमारा आखिरी शूटिंग डे था. हिमांशु अक्सर कहता था कि ‘कल दे दूंगा', लेकिन जब मैं अगले दिन गया, तो उसने अब भी सीन नहीं लिखा था. मैंने उससे कहा, ‘मैं बनारस से तब तक नहीं जाऊंगा जब तक ये सीन शूट नहीं कर लेता.'"

रांझणा में सोनम कपूर, अभय देओल और धनुष लीड रोल में थे.
"एक-दो घंटे बाद, हिमांशु गंगा घाट पर आया जहां मैं शूटिंग कर रहा था और उसने वो सीन सुनाया. जब मैंने उसे सुना तो मैं इतना भावुक हो गया — हमारी चाय वहीं रखी-रखी ठंडी हो गई — और मैं चुपचाप उठकर चला गया. मैंने पूरी यूनिट से कहा, आज के शेड्यूल से ब्रेक लो. वहीं उस दृश्य की रेखाओं ने मुझे उसका दृश्य दे दिया."
वह दृश्य, काव्यात्मक, उदासी भरा और गहराई से भरा हुआ, 'रांझणा' के सबसे अविस्मरणीय पलों में से एक बन गया और यह आनंद एल राय, लेखक हिमांशु शर्मा और फिल्म की आत्मा धनुष के बीच रचनात्मक केमिस्ट्री का प्रमाण है. कलर येलो प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित, 'रांझणा' सिर्फ एक प्रेम कहानी से कहीं बढ़कर बन गई. यह जुनून, लालसा और बलिदान के बारे में एक फिल्म थी, जिसे संगीतमय जादू और बेहतरीन कहानी कहने के माध्यम से एक साथ रखा गया था. इरशाद कामिल के तीखे बोलों से लेकर ए.आर. रहमान के अविस्मरणीय स्कोर तक, 'रांझणा' की हर बीट आज भी फैन्स के दिलों में गूंजती है.
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