टीवी की दुनिया में कई चेहरे आए और चले गए. लेकिन कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो वक्त के साथ और भी मजबूत होते जाते हैं. एक ऐसा ही चेहरा… जिसकी आवाज सुनते ही दिमाग में एक सख्त अफसर की इमेज बन जाती है. एक ऐसा किरदार, जिसने हर केस में सच को बाहर निकालकर दर्शकों का भरोसा जीता. और एक ऐसा डायलॉग जो कभी भुलाया नहीं जा सकता. जिसे मीम्स की दुनिया ने भी यादगार बना दिया. ये डायलॉग है कुछ तो गड़बड़ है दया. जिसे सुनकर एक एसीपी की तस्वीर आपके जेहन में भी ताजा हो ही गई होगी. आप समझ गए होंगे कि हम किस कलाकार की बात कर रहे हैं. ये वो कलाकार हैं जिन्होंने पूरे बीस साल तक एक ही किरदार को जिया. पर्दे पर उसे इतनी शिद्दत से निभाया कि दर्शक उन्हें अपने असली नाम से पहचानने की जगह उनके स्क्रीन नेम से ही जानते हैं.
बैंक काउंटर से कैमरे तक का सफर
हम जिस एक्टर की बात कर रहे हैं वो एक्टर हैं एसीपी प्रद्युम्न. जिनका असली नाम है शिवाजी साटम. 1950 में मुंबई में जन्मे शिवाजी साटम सिर्फ एक शानदार अभिनेता ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी अव्वल रहे. उन्होंने फिजिक्स में ग्रेजुएशन और फिर बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की. एक्टिंग में आने से पहले वो सेंट्रल बैंक में बतौर कैशियर करीब 23 साल तक नौकरी करते रहे. लेकिन दिल तो थिएटर में बसता था. 1976 में उन्होंने मंच से अपने सपनों को आकार देना शुरू किया और यहीं से शुरू हुआ उनके एक्टिंग करियर का असली सफर. जो आगे चलकर टीवी और फिल्मों तक पहुंचा.
एक किरदार, जिसने बना दिया इतिहास
1998 में शुरू हुआ CID और इसके साथ ही जन्म हुआ एसीपी प्रद्युम्न का. एक ऐसा किरदार जिसने भारतीय टीवी के इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई. शिवाजी साटम ने इस रोल को इतने दमदार तरीके से निभाया कि दर्शक उन्हें उनके असली नाम से कम और एसीपी प्रद्युमन के नाम से ज्यादा पहचानने लगे. करीब 20 साल तक एक ही किरदार निभाना आसान नहीं होता. लेकिन उन्होंने इसे हर बार नया और दिलचस्प बनाया. उनकी सख्त आवाज, तेज नजर और केस सुलझाने का अंदाज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है. यही वजह है कि उनका ये सफर सिर्फ एक रोल नहीं बल्कि एक मिसाल बन गया.
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