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25 करोड़ बजट, 87 करोड़ कलेक्शन, 3 कैरेक्टर, ब्लैक ऐंड व्हाइट हॉरर मूवी, 74 साल का एक्टर जीत ले गया नेशनल अवॉर्ड

इस फिल्म में सिर्फ तीन कैरेक्टर हैं. इसे 25 करोड़ के बजट में बनाया गया और ये एक हॉरर मूवी है. 74 साल के एक्टर ने इस फिल्म के लिए करियर का चौथा नेशनल अवॉर्ड जीता है.

25 करोड़ बजट, 87 करोड़ कलेक्शन, 3 कैरेक्टर, ब्लैक ऐंड व्हाइट हॉरर मूवी, 74 साल का एक्टर जीत ले गया नेशनल अवॉर्ड
ब्लैक ऐंड व्हाइट इस हॉरर मूवी को शुरू किया तो खत्म किए बिना उठना होगा मुश्किल
IMDb
नई दिल्ली:

मलयालम सिनेमा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कहानी और कलाकारों की ताकत बजट और ग्लैमर से कहीं बड़ी होती है. डायरेक्टर राहुल सदाशिवन की 'ब्रह्मयुगम' एक ऐसी फिल्म है जिसे कम्प्लीट सिनेमा कहा जा सकता है. मात्र तीन मुख्य किरदारों, 25 करोड़ के किफायती बजट और पूरी तरह ब्लैक एंड व्हाइट फॉर्मेट में बनी इस हॉरर फिल्म ने दुनियाभर में 87 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है. अब इस फिल्म के एक्टर ममूटी को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट एक्टर के अवॉर्ड से नवाजा गया है. आइए एक नजर डालते हैं 'ब्रह्मयुगम' की कुछ खास बातों पर. 

सिर्फ तीन कैरेक्टर्स की है 'ब्रह्मयुगम' की कहानी

फिल्म 17वीं शताब्दी के केरल में सेट है. कहानी लोक गायक थेवन (अर्जुन अशोकन) की है, जो घने जंगल में स्थित पुरानी हवेली में पहुंच जाता है. वहां वह रहस्यमय कुक (सिद्धार्थ भारथन) और हवेली के मालिक कोडुमन पोट्टी (ममूटी) से मिलता है. तीनों किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती यह फिल्म ताकत, जाति व्यवस्था, भय और पागलपन की गहरी पड़ताल करती है. बिना किसी सब-प्लॉट या अतिरिक्त किरदारों के, फिल्म पूरी तरह एक ही लोकेशन पर शूट हुई है. 

ब्लैक एंड व्हाइट का मायावी संसार

ब्लैक एंड व्हाइट फॉर्मेट 'ब्रह्मयुगम' की सबसे बड़ी खासियत है. राहुल सदाशिवन ने जानबूझकर रंगों को हटाकर फिल्म को पुराने दौर का एहसास दिया. कैमरा मूवमेंट दर्शकों को 17वीं सदी के अंधेरे युग में ले जाकर खड़ा कर दिया. संगीत और प्रोडक्शन डिजाइन ने भी माहौल को और भयावह बना दिया. फिल्म को ‘साइकोलॉजिकल हॉरर' और ‘फोक हॉरर' दोनों श्रेणियों में सराहा गया.

'ब्रह्मयुगम' के लिए ममूटी नेशनल अवॉर्ड, करियर का चौथा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

'ब्रह्मयुगम' ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (2024 के लिए) में दो महत्वपूर्ण पुरस्कार जीते हैं: बेस्ट एक्टर सर्वश्रेष्ठ ममूटी और बेस्ट सिनेमैटोग्राफी शहनाद जलाल. इस फिल्म की सबसे बड़ी बात 74वर्षीय ममूटी की परफॉर्मेंस है. कोडुमन पोट्टी के रोल में वे इतने खतरनाक, रहस्यमय और पावरफुल नजर आए कि उन्होंने दर्शकों को डराकर रख दिया. उनके एक्सप्रेशन, बोलने का लहजा और बॉडी लैंग्वेज ने पूरे फिल्म को संभाल रखा. यह ममूटी का चौथा नेशनल अवॉर्ड है. 

'ब्रह्मयुगम' का बजट और कलेक्शन

बजट और कमाई की बात करें तो फिल्म का प्रोडक्शन बजट मात्र 25-27 करोड़ रुपये था. मलयालम में रिलीज होने के बाद हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ में डब्ड वर्जन भी जारी किए गए. घरेलू और ओवरसीज बाजार दोनों में फिल्म ने शानदार प्रदर्शन किया. 87 करोड़ की वर्ल्डवाइड कमाई ने साबित कर दिया कि अच्छी स्क्रिप्ट और दमदार एक्टिंग के साथ प्रयोग भी सफल हो सकते हैं. 

ओटीटी पर कहां देखें 'ब्रह्मयुगम' 

'ब्रह्मयुगम' मलयालम सिनेमा के नए युग का प्रतीक बन गई है. आलोचकों ने इसे ‘मास्टरक्लास इन सिनेमैटिक टेंशन' कहा है. अगर आप इसे ओटीटी पर देखना चाहते हैं तो सोनीलिव पर देखा जा सकता है.

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