सदाबहार सिंगर आशा भोसले का 12 अप्रैल को 92 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, जिससे उनके फैंस, परिवार और करीबी में शोक की लहर दौड़ गई. वेटरन एक्ट्रेस और आशा भोसले की दोस्त मुमताज ने बताया कि उनके निधन के कुछ ही समय पहले वह आशा जी से मिलने गई थीं और महज कुछ मिनटों के अंदर उन्हें मौत की खबर मिली. उन्होंने आशा के साथ अपने रिश्ते पर भी बात की. विकी लालवानी के साथ बातचीत में, मुमताज ने उस पल को याद करते हुए कहा, "जब मुझे पता चला कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, तो मैं वहां गई. मैंने उन्हें बाहर से देखा, लेकिन डॉक्टर ने कहा कि आशा जी की हालत गंभीर है और मुझसे अगले दिन आने को कहा. जब मैं वहां से निकली और कार में बैठी तो 5-10 मिनट के अंदर ही मुझे फोन आया कि उनका निधन हो गया है."
ऐसा था आशा जी से मुमताज का रिश्ता
अपने निजी रिश्ते के बारे में बात करते हुए मुमताज ने कहा, "वह कुछ बार मेरे घर आई थीं. वह बहुत अच्छी दोस्त थीं. उनकी जगह कोई नहीं ले सकता. आप उनकी तुलना किसी से नहीं कर सकते." मुमताज ने यह भी बताया कि अपनी मौत से कुछ दिन पहले आशा भोसले ने उनसे कहा था कि उनका एक गाना उनके गाए हुए सभी गानों में सबसे मुश्किल था. उन्होंने कहा, "आशा जी ने अपने निधन से पहले मुझसे कहा था कि मेरा गाना 'आजा ओ मेरे राजा, जन्नत की सैर' उनके गाए हुए सभी गानों में सबसे मुश्किल था."
लता और आशा में अंतर
मुमताज ने आशा भोसले की अपनी बहन, लता मंगेशकर के साथ अनोखी जगह के बारे में बात की. "दोनों के बीच कोई तुलना नहीं है. जो आशा जी गा सकती थीं, वह लता जी नहीं गा सकती थीं और जो लता जी गा सकती थीं, वह आशा जी नहीं गा सकती थीं. आशा जी चंचल गाने गाती थीं, जबकि लता जी शास्त्रीय संगीत में माहिर थीं, आप उनकी तुलना कर ही नहीं सकते."
अंतिम संस्कार का वीडियो किया था शेयर
इससे पहले मुमताज ने आशा भोसले के अंतिम संस्कार का एक वीडियो शेयर किया था. इस क्लिप में वह दिवंगत सिंगर को देखते हुए कहती हैं, "कितनी प्यारी लग रही हैं," और फिर वीडियोग्राफर से पास आकर उस पल को कैमरे में कैद करने को कहती हैं, जिसे वह "यादगारी" (याद रखने लायक पल) बताती हैं.
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गौरतलब है कि आशा भोसले को 11 अप्रैल को सीने में संक्रमण के कारण ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अगले ही दिन उनका निधन हो गया. उनके बेटे, आनंद भोसले ने शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया, और 13 अप्रैल को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई.
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