डबल मीनिंग लिरिक्स आज के जमाने में कोई अतरंगी बात नहीं. गाने ही नहीं फिल्म के डायलॉग भी कई दफा डबल मीनिंग हो जाते हैं. कभी ये बचकर निकल जाते हैं तो कभी नजरों में आने पर विवादों में आ जाते हैं. आज हम आपको एक ऐसे गाने के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि असल में डब मीनिंग नहीं था लेकिन उसके लिरिक्स ने लोगों को कनफ्यूज कर दिया. बात इस हद तक सीरियस हो गई थी कि रेडियो पर आकर सफाई देने पड़ी.
आशा भोसले का विवादित गाना
साल 1991 में हेमा मालिनी, डिंपल कपाड़िया और विनोद खन्ना ते लीड रोल वाली लेकिन के लिए आशा ताई ने एक गाना गाया था. गाना बेहद सी सिम्पल और सीधा सा था लेकिन सुनने वालों को इसे समझने और सिचुएशन के साथ देखने पर गलत फहमी हो गई. इसी वजह से गाने पर सवाल उठने लगे. ये गाना था 'झूठे नैना बोले सांचीं बत्तियां'.
ये गाना हेमा मालिनी पर फिल्माया गया था. इस गाने के लिरिक्स में जो बातें हैं उनमें एक महिला अपने पार्टनर से किसी और के साथ रात गुजारने को लेकर सवाल करती नजर आती है. इस गाने की पहली लाइन थी 'झूठे नैना बोले...' इस लाइन को सीन के हिसाब से गलत समझ लिया गया. यहां इस शब्द को झूठा समझा जाता है. इसे लेकर इतनी चर्चा हुई था कि गाने का मतलब समझाने के लिए गुलजार और आशा भोसले को खुद रेडियो पर आना पड़ा था. उन्होंने साफ किया था कि यहां झूठे नहीं बल्कि जूठे शब्द का इस्तेमाल हुआ है. जूठा यानी कि किसी का खाया हुआ.
लता मंगेशकर थीं लेकिन की प्रोड्यूसर
आशा भोसले के गाने की वजह से चर्चा में रही 'लेकिन' की प्रोड्यूसर उनकी बहन लता मंगेशकर थीं. इस फिल्म की कहानी गुलजार ने लिखी थी. ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई. एक गाने को लेकर विवाद हुआ लेकिन इसी फिल्म का एक गाना था जो कि आज भी खूब सुना जाता है. ये गाना है 'यारा सीली सीली'
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