Alpha Review In Hindi: यश राज फिल्म्स की मचअवेटेड स्पाई एक्शन फिल्म 'अल्फा' 3 जुलाई को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. लंबे समय से इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी एक्साइटमेंट देखने को मिली थी. वहीं ट्रेलर में ऋतिक रोशन के कैमियो ने फैंस की उत्सुकता को और भी बढ़ा दिया था. लेकिन अब आलिया भट्, बॉबी देओल, अनिल कपूर और शारवरी वाघ स्टारर अल्फा सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, जिसका निर्देशन शिव रवैल ने किया है. आइए आपको बताते हैं कि कैसी है स्पाई थ्रिलर अल्फा.
अल्फा की कहानी
अल्फा की कहानी 1999 से शुरू होती है जब कारगिल युद्ध खत्म हुआ होता है. एक बटालियन से सिर्फ दो ही लोग बचते हैं अनिल कपूर और बॉबी देओल. बॉबी देओल कसम खाता है कि वो ऐसे सोलजर बनाएगा जो दुश्मन देश को नेस्तानाबूद कर देंगे. इस तरह एक अल्फा नाम से इंजेक्शन बनता है और ये सोलजर्स को दिया जाता है. ये बेहद खतरनाक बन जाते हैं. अनिल कपूर की बीवी दीया मिर्जा मां बनने वाली है. लेकिन तबियत नासाज है. अनिल कपूर को लगता है कि ये इंजेक्शन लगाने से उनकी बीवी ठीक हो जाएगी. लेकिन यहीं कुछ ऐसा होता है कि फिल्म की तासीर ही बदल जाती है. अब आलिया भट्ट कौन है. बॉबी देओल उसे अल्फा क्यों बनाता है, फिर मिशन ओडेसी क्या है? इन सब सवालों के जवाब तो फिल्म देखकर ही मिलेंगे लेकिन कहानी के मोर्चे पर फिल्म बेहद कमजोर है और खामियां तो ऐसी हैं कि चेहरे पर मुस्कान दौड़ने लगेगी. फिर आप सोचेंगे कि क्या वाईआरएफ के स्पाई यूनिवर्स के ताबूत में अल्फा आखिरी कील है. हां एक बात और, फिल्म में ऋतिक रोशन के कैमियो से ज्यादा उम्मीद मत लगाइएगा क्योंकि वह ना दिल में आता है और ना ही दिमाग में
अल्फा का डायरेक्शन
शिव रवैल ने डायरेक्शन में बेहद कच्चापन दिखाया है. शायद वे ये भूल गए कि ये वो स्पाई यूनिवर्स है जिसकी बुनियाद भाईजान सलमान खान ने रखी है. ये फिल्म ना तो म्यूजिक और ना ही ऐक्शन और ना ही कहानी के मामले में कोई नयापन लेकर आई है. डायरेक्शन में भी कच्चापन है और वे कहानी को सही से प्रेजेट भी नहीं कर सके हैं. अब ट्रेलर का वो सीन तो आपको याद ही होगा जिसमें आलिया भट्ट और शरवरी लड़ रही होती हैं. शरवरी कहती है कि मुझे तुमसे बात करनी है. आलिया कहती है मुझे रोक सको तो बात हो जाएगी. अब जब ये फाइटिंग सीन खत्म होता है तो आलिया खुद ही कहती है कि मैं यहां बात करने आई थी. फिल्म में टाइमलाइन का भी तगड़ा झोल है. कुल मिलाकर स्पाई यूनिवर्स से कुछ ऐसी उम्मीद नहीं रहती है.
अल्फा में एक्टिंग का हाल
अल्फा में अगर किसी की एक्टिंग जमी है तो वो बॉबी देओल हैं. उनसे जो कहा गया वो करते गए और इस तरह के किरदार करने में वह माहिर हो चुके हैं. जो विलेन हों. लेकिन आलिया भट्ट फिल्म की लीड हैं, वो कई सीन में अच्छी लगी हैं लेकिन कहीं तो एकदम किरदार से आउट हो जाती हैं. जिस तरह का स्वैग और एक्शन चाहिए होता है वो आलिया नहीं दिखा सकी हैं. पठान, कबीर और टाइगर तो आपको याद ही होंगे. शरवरी किसी भी सीन में सीरियस नहीं दिखती हैं. अनिल कपूर ने जो एक एक्सप्रेशन पकड़ा, उसे शुरू से लेकर आखिर तक पकड़े रखा है.
अल्फा वर्डिक्ट
अल्फा स्पाई यूनिवर्स की फिल्म है, लेकिन वैसा मजा बिलकुल मिसिंग है. ऋतिक रोशन का कैमियो, पूरी तरह समय की बर्बादी है. एक्शन के चक्कर में कहानी से फोकस छूट गया है. इस रोल के लिए आलिया और शरवरी मिसफिट हैं. डायलॉग बेहद ड्रामैटिक हैं. मेलोड्रामा भी है. एक्शन के समय ओवरएक्टिंग भी है. वैसे भी यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स का रुतबा समय के साथ घटता जा रहा है. ये भी उसी कड़ी में है. अगर आप आलिया भट्ट और शरवरी के फैन हैं तो देख सकते हैं. बॉबी देओल विलेन पसंद है तो देख सकते हैं. लेकिन अगर एक था टाइगर जैसी उम्मीद लगाकर देखने जा रहे हैं तो दिल चकनाचूर हो सकता है.
रेटिंग: 1.5/5 स्टार
डायरेक्टर: शिव रवैल
कलाकार: आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, बॉबी देओल और अनिल कपूर
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