बॉलीवुड के कुछ गाने क्षेत्रीय गानों से प्रेरित होते हैं. कुछ गाने भोजपुरी फिल्मों से लेकर गीत से प्रेरित रहते हैं. जब वह हिंदी में आए तो रातों-रात हिट हो गए हैं. ऐसा ही एक गाना 31 साल पहले आया था, जो हर किसी की जुबान पर छा गया था. यह गाना जेठ महीने पर बनाया गया था. इस गाने का नाम ‘जेठ की दोपहरी में पांव जले' है. यह गाना साल 1995 में आई फिल्म ‘कुली नंबर 1' का है.
ऐसे आया गाने का ख्याल
गोविंदा और करिश्मा कपूर के इस गाने को पूर्णिमा और कुमार सानू ने अपनी शानदार आवाज में गाया है. जबकि गाने के बोल गीतकार समीर अनजान ने लिखे हैं. ‘जेठ की दोपहरी में पांव जले' गाने की कहानी काफी दिलचस्प है. इस गाने का जन्म बिहार की पारंपरिक नौटंकी से हुआ था. समीर अनजान ने एक पॉडकास्ट में इस गाने की मेकिंग का किस्सा सुनाया.
उन्होंने बताया कि एक बार वह बिहार गए हुए थे. वहां गांव-देहात में होने वाले नौटंकी कार्यक्रम को देखने पहुंचे. मंच पर कलाकार बार-बार एक लाइन दोहरा रहे थे, ‘जेठ की दोपहरी में पांव जले'. समीर को यह लाइन बहुत पसंद आ गई. उन्होंने फैसला किया कि इसी पर पूरा गाना लिखेंगे. इसी से ‘कुली नंबर 1' के लिए यह गाना तैयार हुआ.
गांव-देहात के लोगों का बना पसंदीदा
‘जेठ की दोपहरी में पांव जले' गाने में भोजपुरी भाषा की शैली का अच्छा इस्तेमाल किया गया है. यही वजह है कि बिहार और आसपास के गांव-देहात के लोग इसे अपना गाना मानते हैं. करिश्मा कपूर की अदाएं और गोविंदा के डांस के साथ यह गाना डांसिंग एंथम बन गया. फिल्म रिलीज हुए 31 साल से ज्यादा हो गए, लेकिन गाना आज भी पार्टियों और शादियों में बजाया जाता है.
बात करें फिल्म ‘कुली नंबर 1' की तो इस फिल्म में गोविंदा और करिश्मा कपूर के साथ हरीश कुमार, कंचन, कादर खान, महेश आनंद, सदाशिव अमरापुरकर और शक्ति कपूर जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में थे. इस फिल्म का बजट करीब 3.50 करोड़ रुपये था और ‘कुली नंबर 1' ने बॉक्स ऑफिस पर 21.22 करोड़ रुपये की कमाई की थी. यह उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक थी .
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