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20 मार्च को रिलीज हुई 18 सितारों से सजी इस फिल्म में दौड़ी थी ‘मौत की ट्रेन’, 5 साल में बनी, करोड़ों झोंके फिर भी नहीं बन पाई सुपरहिट

20 मार्च बॉलीवुड के इतिहास में एक ऐसी फिल्म की रिलीज डेट के तौर पर दर्ज है, जिसमें एक साथ कई बड़े सितारे नजर आए, बड़ा बजट था और कहानी भी बेहद अलग थी, लेकिन फिर भी बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा कमाल नहीं दिखा पाई.

20 मार्च को रिलीज हुई 18 सितारों से सजी इस फिल्म में दौड़ी थी ‘मौत की ट्रेन’, 5 साल में बनी, करोड़ों झोंके फिर भी नहीं बन पाई सुपरहिट
20 मार्च को रिलीज हुई थी 18 स्टार वाली ये फिल्म

20 मार्च बॉलीवुड के इतिहास में एक ऐसी फिल्म की रिलीज डेट के तौर पर दर्ज है, जिसमें एक साथ कई बड़े सितारे नजर आए, बड़ा बजट था और कहानी भी बेहद अलग थी. हम बात कर रहे हैं द बर्निंग ट्रेन की, जिसे रवि चोपड़ा ने निर्देशित किया था. इस फिल्म में धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, हेमा मालिनी, जीतेंद्र, परवीन बाबी, नीतू सिंह और डैनी जैसे बड़े नाम शामिल थे. करीब 18 सितारों से सजी यह फिल्म अपने समय की सबसे महंगी फिल्मों में गिनी जाती थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह उम्मीद के मुताबिक धमाका नहीं कर पाई.

बजट बड़ा, कमाई ठीक-ठाक

द बर्निंग ट्रेन का बजट उस दौर में करीब 2.5 से 3.25 करोड़ था, जो आज के हिसाब से लगभग 250-325 करोड़ के बराबर माना जाता है. इतनी बड़ी लागत और मल्टीस्टारर कास्ट के बावजूद फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन करीब 6.5 करोड़ ही रहा. हालांकि, यह 1980 की 7वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी, लेकिन इसे 'औसत से भी कम' का टैग मिला. फिल्म को बनने में करीब 5 साल का समय लगा, जिसमें भारी-भरकम सेट्स और स्पेशल इफेक्ट्स पर खास ध्यान दिया गया था. उस दौर के लिहाज से इसकी तकनीक काफी एडवांस मानी गई, लेकिन कहानी की गति और लंबाई दर्शकों को पूरी तरह बांध नहीं पाई.

फिल्म से जुड़ा दिलचस्प किस्सा

फिल्म की कहानी विनोद खन्ना के किरदार विनोद वर्मा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भारत की सबसे तेज ट्रेन ‘सुपर एक्सप्रेस' बनाने का सपना देखता है. सालों की मेहनत के बाद यह ट्रेन दिल्ली से बॉम्बे के बीच रिकॉर्ड 14 घंटे में चलने के लिए तैयार होती है. लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब एक दुश्मन ट्रेन में बम प्लांट कर देता है, जिससे 500 यात्रियों की जान खतरे में पड़ जाती है. ट्रिविया की बात करें तो फिल्म की शुरुआत में अमिताभ बच्चन को कास्ट किया गया था, लेकिन बाद में उनकी जगह जीतेंद्र को लिया गया. कुल मिलाकर, शानदार स्टारकास्ट, बड़े बजट और अलग कहानी के बावजूद द बर्निंग ट्रेन वो मुकाम हासिल नहीं कर पाई, जिसकी उससे उम्मीद की जा रही थी.

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