सत्ता नहीं, पार्टी संभालेंगे.. पिता की विरासत को बढ़ाने के लिए निशांत कुमार का क्या है फ्यूचर प्लान?

नीतीश कुमार जब तब बिहार के सीएम की कुर्सी पर रहें, तब तक निशांत एक्टिव पॉलिटिक्स में नहीं आए. हालांकि अब जब यह तय हो गया कि नीतीश सीएम की कुर्सी को छोड़ रहें है तो निशांत कुमार की पार्टी में एंट्री हुई.  

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  • निशांत कुमार ने हाल ही में जेडीयू ज्वाइन की और पिछले कुछ महीनों से वह काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं.
  • नीतीश कुमार परिवारवाद के खिलाफ बोलते थे, वो नहीं चाहते थे कि उनके बेटे राजनीति में आएं.
  • निशांत कुमार ने बिहार में नई सरकार का हिस्सा बनने से मना कर दिया. जानकारों का कहना है कि यह सही फैसला है.
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बिहार में 20 सालों तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने अपने लंबे कार्यकाल के बाद आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अब बिहार को सम्राट चौधरी के रूप में बिहार का नया मुख्यमंत्री मिला है. नीतीश कुमार फिलहाल राज्यसभा के सदस्य हैं और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. जेडीयू पिछले 20 सालों से बिहार की सत्ता में बड़े भाई की भूमिका में थी, लेकिन यह पहली बार है कि बीजेपी बड़े भाई की भूमिका में आ गईं है. ऐसे में सवाल यह हैं जेडीयू का बिहार में आगामी भविष्‍य क्‍या होगा. वहीं नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार नई सरकार का हिस्‍सा नहीं हैं. ऐसे में सवाल है कि वह किस तरह से नीतीश की विरासत को आगे ले जा पाएंगे? 

निशांत कुमार ने हाल ही में जेडीयू ज्वाइन की और पिछले कुछ महीनों से वह काफी सक्रिय और राजनीतिक रूप से काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं. निशांत कुमार की उम्र करीब 50 साल हो गई है. नीतीश कुमार जब तब बिहार के सीएम की कुर्सी पर रहें, तब तक निशांत एक्टिव पॉलिटिक्स में नहीं आए. हालांकि अब जब यह तय हो गया कि नीतीश सीएम की कुर्सी को छोड़ रहें है तो निशांत कुमार की पार्टी में एंट्री हुई.  

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निशांत ने आखिर इतनी लेट पार्टी क्‍यों ज्वाइन की?

नीतीश कुमार को हमेशा से ही परिवारवाद की राजनीति से दूर रहने वाले नेता के रूप में जाना जाता है. अभी तक उनके परिवार का कोई भी शख्‍स सक्रिय राजनीति में नहीं था और निशांत भी लंबे समय तक राजनीति में नहीं आए. शुरू से नीतीश कुमार की छवि एक समाजवादी नेता के तौर पर रही है और वह पिछले 20 सालों तक बिहार की सत्ता का केंद्र रहे. हालांकि इन सब के बावजूद भी निशांत राजनीति से दूर रहे हैं, जो नीतीश कुमार परिवारवाद के खिलाफ बोलते थे, वो नहीं चाहते थे कि उनके बेटे राजनीति में आएं. यही कारण है कि निशांत को राजनीति में आने में इतना लंबा वक्त लग गया. 

2025 का बिहार विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के चेहरे पर लड़ा गया, जिसमें NDA ने बड़ी जीत हासिल की. बीजेपी को इस चुनाव में 89 सीट मिली, वहीं जेडीयू ने 85 सीटें जीती. दोनों पार्टी लगभग बराबर की सीट जीतने में कामयाब रही, लेकिन इसके बावजूद नीतीश कुमार ने सीएम की कुर्सी से 6 महीने में इस्‍तीफा दे दिया. इससे जेडीयू का कार्यकर्ता काफी अचंभे में है. साथ ही नीतीश कुमार को करीब से जानने वाले भी हैरान हैं कि नीतीश कुमार ने इतनी आसानी से सीएम की कुर्सी छोड़ कैसे दी?

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4 मार्च को घोषणा हुई कि नीतीश कुमार जेडीयू से राज्यसभा उम्मीदवार हैं. उससे पहले  संभावना जताई जा रही थी कि निशांत कुमार को जेडीयू से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया जाएगा. हालांकि ऐसा नहीं हुआ और उसके बाद बिहार में राजनीतिक सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई. इस सत्ता परिवर्तन में पहले ही तय हो गया था कि सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन सबकी नजरें निशांत कुमार पर भी थी. हर कोई जानना चाहता था कि निशांत कुमार की क्या भूमिका होगी?

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8 मार्च को निशांत ने जेडीयू ज्वाइन की

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने 8 मार्च को जेडीयू ज्वाइन की. उम्मीद थी कि अब निशांत बिहार में नई सरकार का हिस्सा बनेंगे और वह बिहार के अगले उपमुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. 

जेडीयू के कार्यकर्ता लंबे वक्त से चाहते थे कि निशांत को पार्टी में आना चाहिए और पार्टी को संभालना चाहिए. साथ ही अपने पिता की पार्टी की विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए. 

जेडीयू के कई नेता और कार्यकर्ता चाहते थे कि निशांत को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनना चाहिए क्योंकि पिता के कुर्सी से हटने के बाद पार्टी के कई लोगों का मानना था कि पहला दावा उस पर निशांत का है, लेकिन पहले ही तय हो चुका था कि सीएम भाजपा का होगा. इसलिए पार्टी कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि निशांत उपमुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन अंतिम वक्त पर यह फैसला सामने आया कि निशांत इस पद को नही लेंगे. 

आखिर क्यों सरकार का हिस्सा नहीं बने निशांत? 

निशांत कुमार ने बिहार में नई सरकार का हिस्सा बनने से मना कर दिया. पार्टी के कई नेताओं और जानकारों का कहना है कि यह फैसला एक तरह से सही है. अभी निशांत नए हैं. ऐसे में पार्टी और संगठन को वह पहले समझना चाहते हैं. वह पार्टी के कार्यकर्ताओं के मूड को समझ रहें हैं. साथ ही वह बिहार में अब जमीन पर भी घूम रहे हैं. बिना विधायक या विधानसभा परिषद सदस्‍य बने सरकार में शामिल होना निश्चित रूप से सही नहीं समझा गया. इसलिए वह अभी अपना सारा वक्त पार्टी को देना चाहते हैं.

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नीतीश कुमार ने पिछले 20 सालों में बिहारी के विकास के लिए जो काम किया है, वह बिहार के लोगों को जमीन तक बताना है. अगर वह सरकार का अंग बनते तो उनकी पार्टी पर पकड़ कम हो सकती थीं. इसलिए उन्होंने अभी पूरा वक्त पार्टी को देने के बारे में सोचा है. इससे पार्टी में एक नई जान आएगी. निशांत पार्टी को एकजुट करके पार्टी का भविष्य बन सकते हैं. साथ ही साथ अगर वह अभी सरकार में कुर्सी पर बैठते तो नीतीश कुमार के राजनीतिक करियर में यह भी दाग लगता कि उन्होंने अपने अपने बेटे को सरकार में शामिल करा दिया. इसलिए निशांत ने अभी खुद को सरकार से अलग रखा. 

नीतीश का कुर्सी छोड़ना निशांत के लिए बड़ी चुनौती

नीतीश कुमार ने 20 सालों के बाद बिहार के मुख्यमंत्री के कुर्सी से इस्तीफा दे दिया. इससे जेडीयू के कार्यकर्ताओं के बीच बहुत नाराजगी है. जमीन पर जेडीयू के कार्यकर्ताओं को लग रहा है कि नीतीश कुमार को साजिश के तहत बीजेपी ने और जेडीयू के कुछ शीर्ष नेताओं ने मिलकर नीतीश को सत्ता की कुर्सी से हटा दिया.  

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नीतीश कुमार के कोर वोटर्स कुर्मी समाज से होते हैं. सबसे ज्‍यादा नाराजगी उनके ही बीच में है. ऐसे में यह सभी वोटर्स और कार्यकर्ता पार्टी से बेहद नाराज हैं. बिहार में अब जमीन पर यही दिखने लग है कि नीतीश का कोर वोटर्स बेहद ठगा महसूस कर रहा है. 

ऐसे में निशांत की जिम्मेदारी और बढ़ जारी है कि पार्टी के ऐसे कार्यकताओं को साथ लाए और उन्हें भरोसा दिलाए कि पार्टी बिल्कुल सुरक्षित है और नीतीश कुमार हमारे मुखिया और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. साथ ही उनके नेतृत्व में ही पार्टी अभी आगे बढ़ेगी. 

ऐसे में निशांत के लिए जेडीयू नेताओं ने नाया नारा भी दिया है , "जय निशांत तय निशांत." पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने यह नया नारा दिया है कि पार्टी का भविष्य निशांत हैं और उनके नेतृत्व में ही हम आगे बढ़ेंगे. ऐसे में 20 अप्रैल को जेडीयू विधान मंडल दल की बैठक होने वाली हैं और उसमें उम्मीद है कि निशांत कुमार को नेता चुना जाएगा और आगे वही पार्टी का नेतृत्‍व करेंगे. 

नीतीश के कदमों पर चलेंगे निशांत

एक वक्‍त नीतीश कुमार ने कहा था कि क्राइम, करप्शन और कम्‍युनिज्‍म  से कोई समझौता नहीं करेंगे और ठीक उसी बात को निशांत ने भी दोहराया है. वह लगातार पार्टी कार्यालय और नीतीश कुमार के आवास पर बैठक कर रहें हैं और पार्टी नेताओं के साथ आगे की रणनीति की भी चर्चा कर रहे हैं. ऐसे में निशांत के हाथों में पार्टी का क्या भविष्य होगा, यही आने वाले समय में पता लगेगा. 
 

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