कमर तक पानी, कांटों से दोस्ती, जी तोड़ मेहनत... तब बनता है मखाना, NDTV रिपोर्टर के साथ जानिए पूरा प्रोसेस

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मखाने की खूब चर्चा है. हालांकि मखाने की खेती की प्रक्रिया बेहद कठिन होती है. मखाना निकालने के लिए आपको कमर तक पानी में रहना पड़ता है, कांटों से दोस्‍ती करनी होती है और जी-तोड़ मेहनत करनी होती है.

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  • मखाना की खेती में किसानों को कमर तक पानी में रहकर कांटों से जूझना पड़ता है, यह प्रक्रिया बहुत कठिन है
  • मखाना निकालने वाले करीब दो सौ रुपए प्रति किलो कमाते हैं, जिसके लिए उन्‍हें कड़ी मेहनत करनी होती है.
  • मखाना निकालने के बाद साफ करने, सुखाने और फ्राई करने की भी लंबी प्रक्रिया है, जिसके बाद हमें मखाना मिलता है.
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केंद्र सरकार के मखाना बोर्ड बनाने के निर्णय और हाल ही में जीआई टैग दिए जाने के बाद बिहार के मखाना व्यापार में काफी तेजी देखी जा रही है. हालांकि बिहार में मखाना व्‍यापार और इससे जुड़े किसानों को कितना फायदा यह भविष्‍य के गर्भ में है, लेकिन बिहार चुनाव से पहले मखाना और मखाना किसानों की चर्चा जमकर हो रही है. ऐसे में इसकी खेती की कठिन प्रक्रिया को हमारे सहयोगी मनोरंजन भारती ने समझा. इसके लिए वे कमर तक पानी में उतरे और आपके लिए इस पूरी प्रकिया को जाना. 

मखाने की खेती की प्रक्रिया को जानने के लिए राहुल गांधी पानी से भरे तालाब में उतरे थे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने पूर्णिया दौरे के दौरान मखाने की चर्चा की थी. हालांकि मखाने की खेती की प्रक्रिया बेहद कठिन होती है. मखाना निकालने के लिए आपको कमर तक पानी में रहना पड़ता है और कांटों से दोस्‍ती करनी होती है. 

बेहद मुश्किल है मखाना की खेती

दरअसल, मखाने की बेल में कांटे ही कांटे होते हैं. पानी से भरे तालाब और कांटों से भरी मखानों की बेल को जितना लगाना कठिन है, उतना ही इसे निकालना भी मुश्किल होता है. 

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मखाना निकालने की प्रक्रिया में कांटे वाले पौधे में से मखाना निकाला जाता है. इस बेहद मुश्किल प्रक्रिया के लिए प्रति किलो करीब 200 रुपए मखाना निकालने वालों को मिलते हैं, जिसके लिए उन्‍हें दिन भर पानी में रहना पड़ता है. 

तालाब में गोता लगाकर निकालते हैं मखाने

मखाना निकालने के लिए तालाब में गोता लगाना होता है या फिर बांस के जरिए पानी से निकाला जाता है और बड़े बर्तनों में इस तरह से हिलाया जाता है कि गंदगी साफ हो जाए. इसके बाद काले रंग के बीज को बैग्‍स में भरकर सिलेंड्रिकल कंटेनर में भरा जाता है, जहां इसे काफी देर तक रोल किया जाता है, जिसके कारण यह बीच नर्म हो जाते हैं. 

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एक दिन बाद अच्‍छी तरह से सुखाने के बाद इन्‍हें फ्राई किया जाता है और फिर बांस के कंटेनर में स्‍टोर किया जाता है. तापमान सही रहे, इसलिए गोबर का लेप लगाया जाता है और कुछ देर बाद एक बार फिर से फ्राई किया जाता है. एक बार बीज जब फटता है तो उसमें से निकलता है सफेद मखाना. 

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