1100 की पेंशन लेने बैंक पहुंची महिला, लेकिन खाते में दिखे ₹7,400,000,000; जानिए फिर क्या हुआ?

पेंशन निकालने के बाद एक महिला ने बैंक कर्मी से अपने खाते में बची राशि की जानकारी मांगी. बैलेंस चेक करते ही बैंक कर्मचारी भी हैरान रह गया, क्योंकि खाते में 740 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दिखाई दे रही थी.

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महिला के खाते में 740 करोड़
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  • बिहार के नवादा जिले के नीम टोला की विधवा रेखा देवी के खाते में अचानक 740 करोड़ से अधिक की राशि दिखाई दी.
  • रेखा देवी को सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत विधवा पेंशन मिलती है और वे हृदय रोग से पीड़ित हैं.
  • खाते में इतनी बड़ी राशि देखकर उनकी तबीयत बिगड़ी और परिजन बताते हैं कि उन्हें हार्ट अटैक जैसी स्थिति हुई.
नवादा:

महज 1100 रुपये की सामाजिक सुरक्षा पेंशन निकालने बैंक पहुंची एक विधवा महिला उस समय घबरा गई, जब उसके खाते में हजार या लाख नहीं, बल्कि 740 करोड़ 68 लाख 72 हजार 895 रुपये शेष होने की जानकारी मिली. बैलेंस सुनते ही महिला की तबीयत बिगड़ गई और परिजनों के अनुसार हार्ट अटैक जैसी स्थिति बन गई. मामला बिहार के नवादा शहर के नीम टोला इलाके का है.

खाते में 740 करोड़ से अधिक की राशि

जानकारी के अनुसार नीम टोला निवासी रेखा देवी, स्वर्गीय उदय नारायण पांडे की पत्नी हैं. उन्हें सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत विधवा पेंशन मिलती है. बिहार पेंशन दिवस पर खाते में पेंशन की राशि आने के बाद वह राशि निकालने के लिए सीएसपी केंद्र पहुंचीं. पेंशन निकालने के बाद उन्होंने बैंक कर्मी से खाते में शेष राशि की जानकारी मांगी. बैलेंस देखते ही बैंक कर्मी भी हैरान रह गया. खाते में 740 करोड़ से अधिक की राशि दिखाई दे रही थी.

क्या यह बैंकिंग सिस्टम की तकनीकी खामी है?

पहले तो किसी को इस पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन दोबारा जांच करने पर भी वही राशि दिखाई दी. यह सुनते ही रेखा देवी घबरा गईं. परिजनों का कहना है कि वह हृदय रोग से पीड़ित हैं और अचानक इतनी बड़ी रकम खाते में देखकर उनकी तबीयत बिगड़ गई. काफी देर बाद उन्हें सामान्य किया जा सका. रेखा देवी ने बताया कि उन्होंने जीवन में कभी इतनी बड़ी राशि नहीं देखी. उन्हें डर लगने लगा कि कहीं इस तकनीकी गड़बड़ी की वजह से उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. घटना की चर्चा पूरे मोहल्ले में फैल गई. लोग इसे बैंकिंग सिस्टम की तकनीकी खामी बता रहे हैं.

परिजनों ने कहा कि इस राशि पर उनका कोई अधिकार नहीं है और जिस स्तर पर यह गलती हुई है, उसकी जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उनका कहना है कि ऐसी लापरवाही किसी भी आम नागरिक, खासकर बीमार व्यक्ति, को गंभीर मानसिक तनाव में डाल सकती है. हालांकि, बैंक बंद रहने के कारण संबंधित अधिकारियों का पक्ष नहीं मिल सका. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह बैंकिंग प्रणाली की तकनीकी गड़बड़ी थी और बाद में खाते में प्रदर्शित अतिरिक्त राशि हटा ली गई.

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