'कॉल टाइमिंग से लेकर लोकेशन डेटा तक की जांच,' NEET छात्रा मामले  में CBI ने तेज की जांच, कई लोग आए घेरे में 

CBI यह भी पता लगा रही है कि घटना की जानकारी सबसे पहले किसे दी गई थी और पुलिस को सूचना देने में कितना समय लगा. इस दौरान क्या हुआ और किसने क्या कदम उठाया, इसकी टाइमलाइन तैयार की जा रही है.

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  • सीबीआई ने नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत की जांच तेज कर हर पहलू को जोड़कर देखना शुरू किया है
  • जांच में छात्रा के भाई के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स, मैसेज और लोकेशन की जानकारी जुटाई जा रही है
  • डिजिटल फॉरेंसिक जांच में डिलीट किए गए मैसेज और कॉल रिकॉर्ड को पुनः हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है
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पटना:

NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई ने अपनी जांच तेज कर दी है. एजेंसी अब मामले के हर छोटे-बड़े पहलू को जोड़कर देखने की कोशिश कर रही है. इसी क्रम में जांच का दायरा छात्रा के भाई के मोबाइल फोन तक पहुंच गया है, जिसे सीबीआई एक अहम कड़ी मान रही है. सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई यह जानने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले और बाद में छात्रा के भाई की गतिविधियां क्या थीं. मोबाइल फोन के जरिए कॉल डिटेल्स, मैसेज और लोकेशन से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है. एजेंसी यह समझना चाहती है कि छात्रा घटना से पहले किन लोगों के संपर्क में थी और किससे उसकी लगातार बातचीत हो रही थी.

जांच में यह पहलू भी शामिल है कि क्या छात्रा किसी तरह के मानसिक दबाव में थी. सीबीआई, छात्रा और उसके भाई के बीच हुई बातचीत का बारीकी से अध्ययन कर रही है. कॉल टाइमिंग और मैसेज की भाषा के आधार पर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि परिवार के भीतर हालात सामान्य थे या किसी तरह का तनाव चल रहा था.

सूत्र बताते हैं कि मोबाइल फोन की डिजिटल फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है. इसमें डिलीट किए गए मैसेज, कॉल रिकॉर्ड और ऐप एक्टिविटी को दोबारा हासिल करने की कोशिश हो रही है. सीबीआई यह भी देख रही है कि घटना के बाद मोबाइल डेटा में किसी तरह की छेड़छाड़ या जानकारी हटाने की कोशिश तो नहीं की गई.

इससे पहले सीबीआई छात्रा के परिजनों, दोस्तों और कोचिंग से जुड़े लोगों से पूछताछ कर चुकी है. अब मोबाइल से मिली जानकारी को इन बयानों से मिलाया जा रहा है. अगर किसी बयान और डिजिटल सबूत में अंतर पाया जाता है, तो उस दिशा में जांच और आगे बढ़ाई जाएगी.इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल जांच को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं. सीबीआई इन दस्तावेजों की भी दोबारा समीक्षा कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौत किन परिस्थितियों में हुई. मोबाइल से मिलने वाली जानकारी इन सवालों के जवाब देने में मदद कर सकती है.

जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि घटना की जानकारी सबसे पहले किसे दी गई थी और पुलिस को सूचना देने में कितना समय लगा. इस दौरान क्या हुआ और किसने क्या कदम उठाया, इसकी टाइमलाइन तैयार की जा रही है. मोबाइल कॉल और लोकेशन डेटा इस पूरी कड़ी को जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है.कुल मिलाकर, नीट छात्रा की मौत के मामले में सीबीआई अब हर पहलू को जोड़कर जांच कर रही है. भाई का मोबाइल फोन इस केस में महत्वपूर्ण सबूत के रूप में उभर रहा है. आने वाले दिनों में जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है.

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