बिहार में सत्ता से पहले संग्राम: गृह विभाग पर JDU-BJP आमने-सामने, किसके हाथ जाएगी असली ताकत?

गृह विभाग को बिहार की राजनीति में सबसे अहम मंत्रालय माना जाता है. इसकी वजह साफ है राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और आंतरिक सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दे इसी विभाग के तहत आते हैं. ऐसे में जो भी दल इस मंत्रालय को अपने पास रखता है, उसकी सरकार में पकड़ और प्रभाव मजबूत माना जाता है.

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  • बिहार की नई सरकार गठन से पहले जेडीयू-बीजेपी के बीच गृह विभाग को लेकर राजनीतिक खींचतान की चर्चा तेज हो गई है.
  • गृह विभाग राज्य की कानून व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है.
  • जेडीयू के नीरज कुमार ने गठबंधन में किसी विवाद से इनकार करते हुए सभी फैसलों को आपसी सहमति से लेने की बात कही.
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बिहार में नई सरकार के गठन से पहले ही सत्ता के गलियारों में हलचल तेज हो गई है. खासकर गृह विभाग को लेकर जेडीयू और बीजेपी के बीच खींचतान की खबरों ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है. हालांकि दोनों दल सार्वजनिक रूप से किसी भी विवाद से इनकार कर रहे हैं, लेकिन अंदरखाने की चर्चा कुछ और ही कहानी बयां कर रही है.

गृह विभाग को बिहार की राजनीति में सबसे अहम मंत्रालय माना जाता है. इसकी वजह साफ है राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और आंतरिक सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दे इसी विभाग के तहत आते हैं. ऐसे में जो भी दल इस मंत्रालय को अपने पास रखता है, उसकी सरकार में पकड़ और प्रभाव मजबूत माना जाता है.

इस पूरे मुद्दे पर जेडीयू की ओर से नीरज कुमार ने साफ तौर पर कहा है कि गठबंधन में किसी तरह की खींचतान नहीं है. उनके मुताबिक, सरकार नीतीश कुमार के नेतृत्व में चलेगी और सभी फैसले आपसी सहमति से लिए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि मैं हूँ न जैसे शब्द कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए आत्मविश्वास का स्रोत हैं. उनका संकेत साफ था कि नेतृत्व को लेकर कोई भ्रम नहीं है और मंत्रालयों का बंटवारा भी सामूहिक निर्णय से होगा.

दूसरी तरफ विपक्ष इस पूरे मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस प्रवक्ता स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि जेडीयू अब उस स्थिति में नहीं है कि वह बीजेपी से किसी तरह की सौदेबाजी कर सके. उनके मुताबिक, जेडीयू को अब वही मिलेगा जो बीजेपी देना चाहेगी. यह बयान गठबंधन में शक्ति संतुलन को लेकर उठ रहे सवालों को और हवा देता है.

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वहीं, आरजेडी की ओर से मृत्युंजय तिवारी ने इसे और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है. उनका कहना है कि बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने वाला है और जनता के जनादेश का अपमान किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने कुछ ही महीनों में नीतीश कुमार की राजनीतिक स्थिति कमजोर कर दी है और अब गृह विभाग को लेकर टकराव इसका उदाहरण है.

विश्लेषण की बात करें तो यह विवाद सिर्फ एक मंत्रालय का नहीं, बल्कि सत्ता में प्रभाव और नियंत्रण का है. जेडीयू लंबे समय से बिहार में नेतृत्वकारी भूमिका निभाती आई है, जबकि बीजेपी का संगठन और वोट बैंक लगातार मजबूत हुआ है. ऐसे में मंत्रालयों का बंटवारा दोनों दलों के बीच शक्ति संतुलन का संकेत भी देगा.

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अगर गृह विभाग जेडीयू के पास रहता है, तो यह संकेत होगा कि नेतृत्व और प्रशासनिक नियंत्रण अब भी नीतीश कुमार के हाथ में मजबूत है. वहीं अगर बीजेपी इस मंत्रालय को हासिल कर लेती है, तो यह गठबंधन में उसके बढ़ते प्रभाव का साफ संकेत माना जाएगा.

फिलहाल, दोनों दल सार्वजनिक तौर पर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष के बयान और सियासी गलियारों की चर्चा यह बताती है कि अंदरखाने सब कुछ पूरी तरह शांत नहीं है. आने वाले दिनों में जब नई सरकार का गठन होगा और मंत्रालयों का बंटवारा सामने आएगा, तब यह साफ हो जाएगा कि आखिर बिहार की सत्ता में असली पकड़ किसकी है.

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