- सम्राट चौधरी को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में 24 अप्रैल को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट देना अनिवार्य है
- बिहार विधानसभा सचिवालय ने 24 अप्रैल को सुबह 11 बजे विशेष सत्र और फ्लोर टेस्ट की तारीख घोषित की है
- एनडीए गठबंधन के कुल विधायक संख्या 201 है जो बहुमत के लिए आवश्यक 122 से काफी अधिक है
नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद हैं और सम्राट चौधरी बिहार के नए मुखिया. बिहार के नए सीएम के लिए चुनौतियां तो हैं पर सबसे पहले उन्हें एक और खास चुनौती से निपटना है. देखने में तो लगता है कि बिहार के नए 'सम्राट' इससे पार भी कर लेंगे. क्या है वो चुनौती और 24 अप्रैल बीजेपी, नए नवेले मुख्यमंत्री के साथ एनडीए के लिए भी क्यों खास है? आइए समझते हैं.
24 अप्रैल को क्या होगा? नई बिहार सरकार के लिए क्यों खास
सीएम सम्राट चौधरी के लिए बिहार की सत्ता संभालने के बाद 24 अप्रैल को एक फ्लोर टेस्ट देना है. विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर विशेष सत्र की तारीख तय कर दी है. सम्राट सरकार 24 अप्रैल को अपने विश्वास मत को लेकर उत्साहित है क्योंकि उसकी स्थिति मजबूत है. फ्लोर टेस्ट के बाद नए कैबिनेट विस्तार का रास्ता भी साफ हो जाएगा. फ्लोर टेस्ट 24 अप्रैल को सुबह 11 बजे होगा.
समझ लीजिए अंक गणित
बीजेपी विधानसभा में 243 सीटें हैं. एनडीए की हालिया बिहार जीत ने उसकी स्थिति मजबूत कर दी है. बहुमत के लिए सत्तासीन पार्टी को 122 का आंकड़ा चाहिए होता है. उस लिहाज से एनडीए की हालत काफी मजबूत है. बीजेपी के पास इस समय 88 विधायक हैं, जेडीयू के पास 85 विधायक हैं, लोक जनशक्ति पार्टी के 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के 5, राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 जिसका कुल जोड़ 201 सीट का बैठता है.
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