बिहार का सीएम आवास: 1 अणे मार्ग, जानें- इसका महाराष्ट्र कनेक्शन

बिहार के मुख्यमंत्री के अधिकारिक पते का महाराष्ट्र कनेक्शन है. मुख्यमंत्री आवास का नाम सर माधव श्रीहरि अणे के नाम पर रखा गया है. सर माधव श्रीहरि अणे बिहार के दूसरे राज्यपाल थे. 

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  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज इस्तीफा देंगे और बिहार में नए मुख्यमंत्री की शपथ बुधवार को होगी.
  • नीतीश कुमार 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास से 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास में शिफ्ट होंगे.
  • मुख्यमंत्री आवास का नाम सर माधव श्रीहरि अणे के नाम पर रखा गया, जो बिहार के दूसरे राज्यपाल थे.
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पटना:

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज इस्तीफा देंगे. बिहार में नए मुख्यमंत्री की शपथ बुधवार को होगी. पिछले 20 साल से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री होने के बतौर 1 अणे मार्ग में रह रहे थे. अब यह ठिकाना भी बदल जाएगा. वे 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास में शिफ्ट हो रहे हैं. बिहार के नए मुख्यमंत्री 1 अणे मार्ग में शिफ्ट होंगे. यह मुख्यमंत्री आवास का आधिकारिक पता है. दिलचस्प बात यह है कि बिहार के मुख्यमंत्री के अधिकारिक पते का महाराष्ट्र कनेक्शन है. मुख्यमंत्री आवास का नाम सर माधव श्रीहरि अणे के नाम पर रखा गया है. सर माधव श्रीहरि अणे बिहार के दूसरे राज्यपाल थे. 

कौन थे माधव श्रीहरि अणे?

आपको बता दें कि सर माधव श्रीहरि अणे महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके से थे. 1930 में उन्होंने विदर्भ में जंगल सत्याग्रह का नेतृत्व किया. वे बाल गंगाधर तिलक के करीबी थे. बाल गंगाधर तिलक के होमरूल लीग का हिस्सा रहे, आजादी की लड़ाई में भी भाग लिया. उन्हें 1941 में वायसराय परिषद का सदस्य बनाया गया था, लेकिन गांधी जी के अनशन के दौरान सरकार के रवैये के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया.

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दरअसल, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब गांधी जी को आगा खां पैलेस में नजरबंद किया गया था. इस दौरान उन्होंने अनशन किया. तब अणे को लगा कि ब्रिटिश सरकार गांधी जी को मरने देने पर आमदा है, फिर उन्होंने इस्तीफा दे दिया.

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बिहार के राज्यपाल बने

बाद में वे बिहार के राज्यपाल हुए. वे 1948 से 1952 तक बिहार के राज्यपाल रहे. संविधान सभा के सदस्य भी रहे. मौजूदा मुख्यमंत्री आवास तब के राजभवन (अब लोक भवन) का ही हिस्सा हुआ करता था. उनके राज्यपाल रहने के दौरान यहां साहित्यकारों की बैठकी होती थी. अणे ने तिलक की जीवनी 'श्रीतिलकायर्णव' बिहार में रहते हुए लिखी. संस्कृत की इस रचना को 1973 में साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला. माधव श्रीहरि अणे के सम्मान में ही इस मार्ग का नाम रखा गया. जो बाद में मुख्यमंत्री का आधिकारिक पता बना.

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