Bihar Unique Wedding: बिहार के छपरा जिले के सारण में बिना सात फेरे और बैंड बाजा के एक अनोखी शादी हुई. इसे देखने के लिए हजारों लोग इसका हिस्सा बने. यह अनोखी शादी अवतार नगर थाना क्षेत्र के केमरीपुर जुआरा गांव में हुई, जहां एक युवा जोड़े ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से हटकर शादी की.
बैंड-बाजा नहीं था लेकिन थे हज़ारों बाराती
इस अनोखी शादी की खासियत यह थी कि दूल्हा-दुल्हन से लेकर शादी की जगह तक सब कुछ बहुत सिंपल था. कोई बैंड-बाजा नहीं था लेकिन हज़ारों बाराती थे. दुल्हन काजल कुमारी ने पीली साड़ी और कुणाल कुमार ने बैंगनी शर्ट और पैंट के साथ पगड़ी पहनी हुई थी.
एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकारा
यह अनोखी शादी गांव के शिव मंदिर के आंगन में हुई. इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आए. इस शादी को इलाके में 'आदर्श शादी' और 'अंबेडकरी शादी' के तौर पर देखा जा रहा है. इसमें पारंपरिक शादी के बजाय दूल्हा-दुल्हन ने बाबा साहेब और बुद्ध की तस्वीरों के सामने एक-दूसरे को पति-पत्नी चुना.
दूल्हा प्राइवेट कंपनी में करता है जॉब
बताया जाता है कि दूल्हा कुणाल कुमार एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि दुल्हन काजल कुमारी पढ़ाई पूरी कर नौकरी की तैयारी कर रही हैं. शादी को लेकर प्रारंभ में लड़की पक्ष में कुछ विवाद हुआ था, लेकिन बाद में आपसी समझौते से मामला सुलझ गया.
विवाह का शपथ पत्र पढ़कर लिया जीवनभर का संकल्प
पंडित अरविंद उपाध्याय ने विवाह की रस्में की जगह वर-वधू के रिश्तेदारों और ग्रामीणों की मौजूदगी में सात फेरों की जगह विवाह का शपथ पत्र पढ़कर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प दिलवाया. इस विवाह को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे.
आधुनिक मूल्यों को दिया बढ़ावा
समारोह में मौजूद जनहित फाउंडेशन ट्र्स्ट के संचालक एवं पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष राजेंद्र राय ने कहा कि ऐसे विवाह समाज में समानता, तार्किक सोच और आधुनिक मूल्यों को बढ़ावा देते हैं. उन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर के जरिए रचित संविधान की भावना को अपनाकर समाज को नई दिशा देने की आवश्यकता पर जोर दिया.
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर सरपंच शशिभूषण सिंह, मूखिया प्रतिनिधि यशवीर कुमार, पंचायत समिति सदस्य राजेश सिंह, भाजपा नेता निक्की सिंह, जदयू जिला सचिव मलय सिंह सहित कई ग्रामीण उपस्थित थे.सभी ने नवदंपती को आशीर्वाद दिया।
क्या होता है अंबेडकरवादी विवाह
अंबेडकरवादी विवाह (Ambedkarite marriage) डॉ. भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों-समानता, तर्कसंगतता, और जाति-मुक्त समाज-पर आधारित एक सादा, गैर-ब्राह्मणवादी विवाह समारोह है. इसमें कर्मकांड, दहेज, और आडंबर के बिना, आमतौर पर बौद्ध या संवैधानिक मान्यताओं के अनुसार बुद्ध और बाबासाहेब की तस्वीरों के समक्ष शपथ लेकर शादी की जाती है.
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