बिहार में भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब बांका जिले का जेठौर पुल भी खतरे के साए में आ गया है. भारी वाहनों के लगातार दबाव के कारण पुल के सात और आठ नंबर पिलर समेत करीब आधा दर्जन पिलरों की नींव जमीन के स्तर से लगभग पांच फीट ऊपर आ गई है. इससे पुल के किसी भी समय क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ गई है. स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब ठोस कदम उठाने की मांग की है. रविवार को पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता संजीव कुमार सिंह ने तकनीकी पदाधिकारियों की टीम के साथ पुल का निरीक्षण किया.
जेठौर पुल पर बढ़ा दबाव
निरीक्षण के दौरान उन्होंने पिलरों की स्थिति का जायजा लिया और जल्द ही रखरखाव व सुरक्षा कार्य शुरू कराने की बात कही. अधिकारियों ने माना कि पुल के नीचे बहाव और लगातार दबाव के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है. दरअसल, विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद कहलगांव, झारखंड के पाकुड़ और दक्षिण भारत से आने-जाने वाले ट्रक और भारी वाहन अब जेठौर पुल होकर ही उत्तर बिहार व अन्य राज्यों की ओर जा रहे हैं.
एक तरफ झुका पुल
प्रतिदिन लगभग तीन हजार से अधिक भारी वाहनों की आवाजाही से पुल पर अचानक दबाव बढ़ गया है. इसका असर अब पुल की संरचना पर साफ दिखने लगा है. स्थानीय लोगों के अनुसार, पिलर संख्या सात और आठ के बीच पुल का हिस्सा मादाचक की ओर झुकने लगा है. ग्रामीणों ने बताया कि अंधाधुंध बालू के अवैध खनन ने भी पुल की नींव को कमजोर कर दिया है.
कई पिलर की नींव हुई कमजोर
नदी किनारे बसे मादाचक, पतवैय, डुमरिया और चिलकावर गांव के लोगों ने कहा कि तीन-चार वर्ष पूर्व ही पिलरों की नींव जमीन से ऊपर दिखाई देने लगी थी. करीब दो वर्ष पहले इसकी मरम्मत भी कराई गई थी, लेकिन अब स्थिति और खराब हो गई है. ग्रामीणों ने बताया कि पिछले एक पखवाड़े से भारी वाहनों की संख्या बढ़ने के बाद पुल बीच से एक तरफ झुकता नजर आ रहा है. पुल के दोनों ओर एप्रोच पथ में भी बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
कार्यपालक अभियंता संजीव कुमार सिंह ने बताया कि जेठौर पुल के पिलरों के फाइल कप बेड से ऊपर आ गए हैं. नदी में पानी के तेज बहाव से पुल को और खतरा हो सकता है. ऐसे में तत्काल पत्थर के बोल्डर डालकर पिलरों के फाइल कप को सुरक्षित किया जाएगा.
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