Tyre Warranty Claim: कहीं आप भी टायर वारंटी के नाम पर बेवकूफ तो नहीं बन रहे? जानें वो सच जो शोरूम वाले नहीं बताते

Tyre Warranty Claim: अगर आपका टायर 50% घिस चुका है और तब खराब हुआ. अब कंपनी नया टायर देगी, लेकिन आपसे नए टायर की आधी कीमत वसूलेगी. यानी जितना इस्तेमाल कर लिया, उतने पैसे आपको देने ही होंगे.

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  • टायर वारंटी केवल मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट पर मिलती है, घिसावट पर कोई क्लेम नहीं मिलता
  • अनकंडीशनल वारंटी में भी कंपनी प्रो-राटा बेस पर पैसे वसूलती है, यानी इस्तेमाल के हिसाब से भुगतान करना होता है
  • टायर घिसने पर क्लेम के लिए व्हील एलाइनमेंट रिपोर्ट जरूरी होती है, एलाइनमेंट न कराने पर क्लेम रिजेक्ट होता है
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Tyre Warranty Claim: क्या आपने नई कार खरीदी है या अपनी पुरानी कार में ब्रांड न्यू टायर डलवाए हैं? अगर हां, तो आपको टायर पर मिलने वाली वारंटी की बधाई दी गई होगी. लेकिन रुकिए. इससे पहले कि आप बेफिक्र होकर सड़कों पर कार दौड़ाएं, टायर वारंटी का वो बड़ा सच जान लें, जिसे कंपनियां अक्सर छिपा लेती हैं. कुछ ऐसी कंडीशन हैं, जिनके जरिए नए टायरों की गारंटी काम नहीं करती और जब शोरुम पर टायर चेंज के लिए पहुंचते हैं तो आपको मुश्किल का सामना करना पड़ता है.

घिसने पर नहीं मिलती वारंटी

सबसे बड़ा सच ये है कि अगर आपका टायर चलते-चलते घिस गया है, तो कंपनी एक पैसा नहीं देगी. वारंटी सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट पर मिलती है. अगर टायर फूल जाए या रबर अपने आप छोड़ने लगे, तभी आप क्लेम कर सकते हैं.

कट गया तो टाटा-बाय बाय

अगर सड़क पर चलते समय किसी पत्थर या नुकीली चीज से टायर कट गया है, तो इसे यूजर डैमेज माना जाता है. कंपनियां इसे वारंटी के दायरे से बाहर रखती हैं. यानी सड़क खराब थी या आपने गड्ढे में गाड़ी कूदा दी, तो जेब आपकी ही ढीली होगी.

अनकंडीशनल वारंटी का जाल

आजकल कुछ ब्रांड्स अनकंडीशनल वारंटी का वादा करते हैं. सुनने में ये बहुत अच्छा लगता है कि कुछ भी हो जाए टायर बदल देंगे, लेकिन इसमें भी पेंच है. कंपनी टायर तो बदल देगी, लेकिन आपसे प्रो-राटा बेस पर पैसे लेगी.

क्या है प्रो-राटा?

मान लीजिए आपका टायर 50% घिस चुका है और तब खराब हुआ. अब कंपनी नया टायर देगी, लेकिन आपसे नए टायर की आधी कीमत वसूलेगी. यानी जितना इस्तेमाल कर लिया, उतने पैसे आपको देने ही होंगे.

व्हील एलाइनमेंट का बहाना

अगर आपके टायर एक तरफ से ज्यादा घिस गए हैं और आप क्लेम करने जाते हैं, तो कंपनी सबसे पहले आपकी कार की एलाइनमेंट रिपोर्ट मांगेगी. अगर आपने टाइम पर एलाइनमेंट नहीं कराया है, तो कंपनी इसे लापरवाही मानकर क्लेम रिजेक्ट कर सकती है.

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टायर की सेफ्टी के लिए जरूरी टिप्स

  • हर 15 दिन में एयर प्रेशर चेक कराएं. कम हवा टायर के साइडवॉल को खत्म कर देती है.
  • हर 5,000 से 7,000 किमी पर टायरों की जगह आपस में बदलें.
  • हर बार सर्विसिंग के समय व्हील एलाइनमेंट जरूर चेक कराएं.

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