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अपने भजन और नाम-जप का करते हैं गुणगान? जान लीजिए इस पर Premanand Maharaj के विचार

Premanand Maharaj: बहुत से लोग अपने भजन, नाम जप का गुणगान करते नहीं थकते हैं. सोशल मीडिया पर अपनी साधना का बखान करते हैं. इसे लेकर वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी ने आगाह किया है. आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा...

Written by Updated : January 03, 2026 5:41 PM IST
अपने भजन और नाम-जप का करते हैं गुणगान? जान लीजिए इस पर Premanand Maharaj के विचार
प्रेमानंद महाराज
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Premanand Maharaj Ji: बहुत से लोग अपने भजन, नाम जप का गुणगान करते नहीं थकते हैं. सोशल मीडिया पर अपनी साधना का बखान करते हैं. इसे लेकर वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी ने आगाह किया है. महाराज जी ने कहा है कि धन की तरह की अपनी साधना को भी छुपाकर रखने की सलाह दी है. इंस्टाग्राम हैंडल @premanandji.essence पर शेयर किए गए एक वीडियो में महाराज जी कहते हैं कि साधना का असली सुख तभी मिलता है, जब अपने भजन और आध्यात्मिक अभ्यास को दूसरों से गुप्त रखा जाए. जानिए महाराज जी ने क्या सलाह दी है..

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साधना को गुप्त रखने का महत्व

प्रेमानंद महाराज कहते हैं, 'अगर आप अपनी भक्ति के अनुभव दूसरों के सामने पेश करने की कोशिश करेंगे कि मैं लगातार नाम जप रहा हूं या साधना कर रहा हूं, तो वह रुक जाएगी. इसलिए अपने साधन को हमेशा गुप्त रखें.' असल में, भक्ति का अनुभव और साधना व्यक्तिगत और अंतरात्मा से जुड़ा हुआ होता है. जब हम इसे सार्वजनिक रूप से दिखाने लगते हैं, तो मानसिकता में अहंकार या प्रदर्शन की प्रवृत्ति आ जाती है. इससे साधना का प्रभाव कमजोर पड़ सकता है.

साधना क्यों गुप्त रखना जरूरी है?

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, साधना और भक्ति को दूसरों के सामने बताना आपके अभ्यास में बाधा डाल सकता है. ठीक वैसे ही जैसे हम अपने धन को छुपाकर सुरक्षित रखते हैं और हर किसी को यह नहीं बताते कि हमारे पास कितना धन है. ठीक उसी तरह भजन रूपी हमारा आध्यात्मिक धन भी सीक्रेट रखना चाहिए.

दिनचर्या और साधना को सीक्रेट कैसे रखें ?

प्रेमानंद महाराज ने इसके लिए सरल उपाय बताए हैं. उन्होंने कहा, सुबह कितने बजे उठते हैं, क्या करते हैं किसी को बताएं नहीं. अगर कोई देख भी ले, तो साधारण बहाना बना लें कि ऐसे ही नींद खुल गई. अपनी भक्ति का अभ्यास सीक्रेट रखें, किसी को यह बताने की जरूरत नहीं कि आप कितने समय तक जप कर रहे हैं. अपनी दिनचर्या जैसे नहाना, योग, ध्यान या साधना का समय भी किसी के साथ न शेयर करें. अगर किसी से बात करनी हो, तो सीधे अपनी बातें न कहें, बल्कि संतों की बात कहकर समझाएं. महाराज बताते हैं कि ऐसा करने से भक्ति और साधना की शक्ति बढ़ती है और जीवन में आध्यात्मिक स्थिरता और मानसिक शांति आती है.

गुप्त साधना के फायदे 

1. साधना को सीक्रेट रखने से आपका ध्यान भटकता नहीं और भक्ति गहरी होती है.

2. निजी साधना आपके मन को स्थिर और शांत रखती है.

3. गुप्त साधना आपको साधना के असली अनुभव और आनंद से जोड़ती है.

4. जब साधना सार्वजनिक नहीं होती, तो बाहरी बाधाएं या आलोचना का असर नहीं पड़ता.

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.