Job resignation story: जॉब छोड़ना हर किसी के लिए आसान नहीं होता. ये कई लोगों के लिए लाइफ का सबसे बड़ा हिम्मत भरा कदम होता है, क्योंकि जैसे ही काम बंद होता है, बैंक अकाउंट में आने वाली फिक्स्ड सैलरी भी रुक जाती है. इसी को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट इन दिनों घूम रहा है और लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है. कॉरपोरेट की दौड़ से बाहर निकलकर कैसा महसूस होता है ? आरुषि नाम की कंटेंट क्रिएटर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए वही दर्द और सुकून शेयर किया है.
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पैसों की तंगी पर सुकून का अहसास (work life balance)
आरुषि नाम का कहना है कि, 'हर महीने मिलने वाले पैसों की याद तो आती है, लेकिन हर वक्त थकान से चूर रहने की मजबूरी अब खत्म हो चुकी है.' 9 से 5 की नौकरी करने वाले जानते हैं कि, कॉरपोरेट की दुनिया में हर दिन नए चैलेंज मिलते हैं और उनके साथ काम करने वाले साथी भी बनते हैं. आरुषि बताती हैं कि, उन्हें मुश्किल काम सुलझाना और कॉलीग्स के साथ समय बिताना बहुत अच्छा लगता था, लेकिन अब उन्हें रात के 12 बजे ऑफिस की प्रॉब्लम्स सॉल्व करने का स्ट्रेस नहीं झेलना पड़ता. ऑफिस की गॉसिप और इंटरनल पॉलिटिक्स से दूर होकर उन्हें जो मेंटल पीस मिला है, उसकी कीमत किसी भी चीज से ज्यादा है.
सुबह की नई शुरुआत और आजादी का मोल (corporate life reality)
आरुषि के मुताबिक, 'बिना थकावट के सोकर उठना और अपने हिसाब से दिन की शुरुआत करना एक अलग ही सुख देता है.' आरुषि मानती हैं कि, 'खुद के दम पर पैसे कमाना और इकोनॉमिकली फ्रीडम पाना जरूरी है. उस पैसे को कमाने के चक्कर में खुद की हेल्थ और खुशियों की 'बलि' देना बिल्कुल समझदारी भरा काम नहीं है.'
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