भारत में नौकरी और कमाई को लेकर सोशल मीडिया पर एक दिलचस्प बहस शुरू हो गई है. एक महिला के पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा, जिसमें उसने बताया कि कुछ पारंपरिक सेवाओं से जुड़े लोग अब अच्छी कमाई कर रहे हैं, जबकि कई कॉरपोरेट कर्मचारी अभी भी संघर्ष कर रहे हैं. यह पोस्ट एक्स पर शेयर की गई थी, जिसके बाद लोगों के बीच करियर और कमाई को लेकर चर्चा तेज हो गई.
‘मेड दीदी' की कमाई पर शुरू हुई चर्चा
महिला ने अपने पोस्ट में लिखा, कि आजकल कुछ घरेलू सेवाओं से जुड़े कामों में भी अच्छी कमाई हो रही है. उसने एक प्लेटफॉर्म Snabbit का उदाहरण दिया, जहां लोग घर की सफाई के लिए प्रोफेशनल्स को बुक कर सकते हैं. महिला के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले कई सफाई कर्मचारी हर महीने करीब 40 हजार रुपये तक कमा लेते हैं. यह सालाना लगभग 4.8 लाख रुपये के बराबर है, जो कई आईटी फ्रेशर्स की शुरुआती सैलरी से भी ज्यादा बताया गया.
बग सॉल्विंग नहीं, बग क्लीनिंग में है पैसा...
महिला ने अपने पोस्ट में टेक इंडस्ट्री पर भी कमेंट किया. उसने लिखा, कि असली पैसा सिर्फ टेक्नोलॉजी में नहीं है, बल्कि सेवाओं और छोटे कारोबार में भी कमाया जा सकता है. उसके शब्दों में, असली पैसा बग सॉल्विंग में नहीं, बग क्लीनिंग में है. मेड दीदी भी अब एंटरप्रेन्योर बन रही हैं. यही आधुनिक भारत की सच्चाई है.
छोटे कारोबार के उदाहरण भी दिए
महिला ने अपने पोस्ट में छोटे व्यवसायों की सफलता का उदाहरण भी दिया. उसने मशहूर चाय बेचने वाले डॉली चायवाला का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने चाय बेचकर एक बड़ा ब्रांड खड़ा किया है और अब उनकी फ्रेंचाइजी भी लाखों में बिकती बताई जाती है. उसका कहना था कि आज के समय में सिर्फ डिग्री या नौकरी का पद ही कमाई तय नहीं करता, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितना मूल्य पैदा करते हैं.
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
12 मार्च को शेयर किए गए इस पोस्ट को अब तक हजारों लोग देख चुके हैं और इस पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं भी आई हैं. एक यूजर ने लिखा- यह सब डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है. दूसरे ने कहा- पारंपरिक व्यवसाय करने वाले लोग अब नई राह बना रहे हैं और कई बार स्थिर कमाई किसी बड़ी नौकरी से बेहतर होती है. एक ने मजाक में लिखा, लगता है असली फुल-स्टैक जॉब तो पूरा घर साफ करना ही है. वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि बुजुर्गों की देखभाल जैसे सेवा क्षेत्रों में भी अच्छी कमाई की संभावना है. कुछ यूजर्स ने यह भी सुझाव दिया कि युवाओं को केवल कॉरपोरेट नौकरी के पीछे भागने के बजाय उद्यमिता के बारे में भी सोचना चाहिए.
(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)
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