Mother raising 10 kids alone: चार कमरों का घर, सीढ़ियों पर बिखरे जूते, रसोई में उबलती केतली और सुबह छह बजे से शुरू होती हलचल...यह कोई आम सुबह नहीं है. यहां हर दिन एक इम्तिहान है, हर रात एक नई फिक्र. तंगी भी है, थकावट भी, लेकिन इस घर की मुखिया के हौसले में जरा भी कमी नहीं. हैरत की बात तो यह है कि इतनी जिम्मेदारियों के बावजूद उनका दिल अभी भी और बच्चों की ख्वाहिश रखता है.
सुबह से शुरू होता है संघर्ष (Morning Struggle Begins at 6 AM)
ब्रिटेन के साउथहैम्पटन में रहने वाली सोन्या ओ लॉघलिन दस बच्चों की सिंगल मदर हैं. द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, वह चार बेडरूम के काउंसिल हाउस में रहती हैं. उनका दिन सुबह छह बजे शुरू हो जाता है. बच्चों को जगाना, नाश्ता तैयार करना और स्कूल के लिए भेजना उनके लिए रोज का इम्तिहान है. उनकी छह बेटियां और चार बेटे हैं. सोन्या कहती हैं कि, बड़े बच्चे जल्दी तैयार हो जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों को काफी मोटिवेशन देना पड़ता है.
तंगी, जिम्मेदारी और सरकारी मदद (Financial Pressure and Government Support)
परिवार का खर्च सरकारी सहायता से चलता है. उन्हें करीब 460 पाउंड चाइल्ड टैक्स क्रेडिट मिलता है. किराए पर 179 पाउंड और हर हफ्ते खाने पर करीब 130 पाउंड खर्च हो जाते हैं. तंगी का आलम यह है कि ऊपर के कमरों में बल्ब तक नहीं लगे. रात में जरूरत पड़ने पर बच्चे मोबाइल की टॉर्च से काम चलाते हैं. इसके बावजूद सोन्या कहती हैं कि वह मां होने की अपनी जिम्मेदारी से खुश हैं.
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फिर भी और बच्चे चाहती हैं (Single mother of 10)
इतनी मशक्कत के बावजूद सोन्या ने आगे भी मां बनने से इनकार नहीं किया. उनका कहना है कि बच्चों के बिना जिंदगी का तसव्वुर मुश्किल है. हालांकि वह मानती हैं कि, फैमिली प्लानिंग पर आगे चलकर गौर करेंगी. सोन्या की जिंदगी आसान नहीं, लेकिन उनका हौसला काबिल-ए-तारीफ है. यह कहानी दिखाती है कि जिम्मेदारी और जज्बे के बीच जिंदगी कैसे चलती रहती है.
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