81 लाख कैश, 25 तोला सोना...भांजे की शादी में मामा ने भरा 1.61 करोड़ का मायरा

नागौर जिले के जायल में एक भव्य मायरा सुर्खियों में है, जहां दो ब्राह्मण भाइयों ने अपनी बहन के बेटे की शादी में 1 करोड़ 61 लाख रुपये का मायरा भरा. इसमें 81 लाख रुपये नकद, 25 तोला सोना, चांदी के जेवरात और अन्य उपहार शामिल हैं.

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नागौर के 2 भाइयों ने भरा साल का सबसे बड़ा मायरा, जाटों के बाद ब्राह्मण समाज ने रचा मायरे का रिकॉर्ड

Rajasthani Wedding Bhaat: सोशल मीडिया पर इन दिनों राजस्थान के नागौर जिले का एक मायरा खूब सुर्खियों में है. नागौर में जायल के जाट भाईयों के बाद ब्राह्मण भाईयों ने मिलकर अपने भांजे की शादी में 1 करोड़ 61 लाख रुपये मायरा भरा है, जिसमें 81 लाख रुपये नकद, 25 तोला सोना समेत अन्य जेवरात दिए गए. यह मायरा अब कस्बे से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह वायरल हो रहा है, जिसे इस साल का सबसे बड़ा मायरा बताया जा रहा है. लोकेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट...

मायरे की परंपरा और जायल की पहचान (Mayra Tradition and Jayal's Legacy)

राजस्थान की मिट्टी में रिश्तों की मिठास और परंपराओं की खुशबू बसी है. नागौर जिले की जायल तहसील में मायरा भरने की परंपरा सिर्फ रस्म नहीं, बल्कि इज्जत और जज्बात का पैमाना मानी जाती है. शादी के मौके पर मामा अपनी भांजी या भांजे को जो भेंट देता है, उसे मायरा कहा जाता है. इस दौरान महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं, जिसे जायल खिंयाला का मायरा कहा जाता है. मायरा राजस्थान की सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है, जिसमें मामा अपनी बहन/भतीजे के विवाह में दिल खोलकर उपहार देते हैं. पहले यह परंपरा मुख्य रूप से जाट समुदाय में चर्चित थी, लेकिन अब अन्य समाज भी इसे आगे बढ़ा रहे हैं.

1 करोड़ 61 लाख का ऐतिहासिक मायरा (Historic Mayra Worth 1.61 Crore)

जायल निवासी ललित व्यास और ओमप्रकाश व्यास ने अपनी बहन गायत्री के पुत्र निलेश के विवाह में करीब 1 करोड़ 61 लाख रुपये का मायरा भरकर इतिहास रच दिया. इस मायरे में 81 लाख रुपये नकद, 25 तोला सोना, चांदी के जेवरात और अन्य कीमती सामान शामिल रहा. स्थानीय लोगों के मुताबिक यह ब्राह्मण समाज में अब तक का सबसे बड़ा मायरा माना जा रहा है. 

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जाट समाज से आगे बढ़ी परंपरा (Tradition Beyond One Community)

नागौर जिले में बीते तीन सालों में 6 से 7 बड़े मायरे भरे जा चुके हैं. पहले यह परंपरा जायल के जाट समुदाय से जुड़ी पहचान थी, लेकिन अब दूसरे समाजों ने भी इसे नई ऊंचाई दी है. किसी ने जमीन दी, किसी ने नगदी और सोना और हर बार मायरे ने समाज में सम्मान बढ़ाया.

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Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.

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