कीड़े चींटी से पहले अपनों की लाशों को ही बना लेते है निवाला, दुनिया की सबसे रहस्यमयी जनजाति की डरावनी सच्चाई

दुनिया में कुछ परंपराएं इतनी रहस्यमयी होती हैं कि उन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है. पापुआ न्यू गिनी की एक जनजाति ऐसी भी थी, जो अपनों के मरने के बाद उन्हें दफनाने की बजाय खा जाती थी. उनका मानना था कि इससे मृत व्यक्ति हमेशा उनके भीतर जिंदा रहेगा.

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लाश को दफन नहीं...खा जाते थे लोग, पापुआ न्यू गिनी की खौफनाक परंपरा

Papua New Guinea Cannibal Tribe: पापुआ न्यू गिनी की पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच कई आदिवासी जनजातियां रहती हैं. इन्हीं में से एक थी फोर जनजाति, जो अपनी अजीब और डरावनी परंपरा के लिए जानी जाती थी. यह जनजाति मृत शरीर को सम्मान के तौर पर खाने की परंपरा निभाती थी, जिसे एंडोकैनिबलिज्म कहा जाता है.

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मौत के बाद दफन नहीं, भोज का रिवाज (Eating the Dead as a Ritual)

फोर जनजाति के लोग मानते थे कि इंसान की आत्मा उसकी देह में बसती है इसलिए अगर अपनों की बॉडी खा ली जाए, तो उनका अस्तित्व हमेशा परिवार में बना रहता है.

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यही वजह थी कि लाश को मिट्टी में दफनाने या जानवरों के हवाले करने से पहले ही उसे खा लिया जाता था, ताकि कीड़े मकोड़े उस तक न पहुंच सकें.

रहस्यमयी बीमारी ने खोला सच (Mysterious tribes of the world)

इस खौफनाक परंपरा का खामियाजा भी सामने आया. फोर जनजाति में एक अजीब बीमारी फैलने लगी, जिसे बाद में कुरु रोग कहा गया.

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यह बीमारी इंसान के दिमाग को धीरे-धीरे नष्ट कर देती थी. लोग हंसते-हंसते गिर पड़ते थे और कुछ महीनों में उनकी मौत हो जाती थी. वैज्ञानिकों ने पाया कि यह बीमारी मृत शरीर खाने से फैल रही थी.

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सरकार ने लगाई परंपरा पर रोक (Government Banned the Practice)

बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए पापुआ न्यू गिनी सरकार और मेडिकल विशेषज्ञों ने इस परंपरा पर सख्त रोक लगा दी. धीरे-धीरे लोगों को समझाया गया कि यह आस्था नहीं, बल्कि जानलेवा खतरा है. इसके बाद इस जनजाति में महामारी का असर कम होने लगा.

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यह कहानी बताती है कि अंधविश्वास और परंपराएं कभी-कभी इंसान की जान तक ले सकती हैं. साथ ही यह भी दिखाती है कि विज्ञान कैसे रहस्यमयी बीमारियों के पीछे छिपे सच को उजागर करता है.

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