साल 2017 में एक नस्लभेदी टिप्पणी ने जो शुरुआत की, वह बाद में सांस्कृतिक गर्व और आत्मविश्वास का वैश्विक प्रतीक बन गई. ब्रिटेन में बसे सिख अरबपति और कारोबारी रूबेन सिंह को उनकी पगड़ी को लेकर निशाना बनाया गया था. लेकिन, उन्होंने इस अपमान को नजरअंदाज करने के बजाय ऐसा कदम उठाया, जिसने दुनिया का ध्यान खींच लिया.
‘रोल्स-रॉयस टर्बन चैलेंज' की शुरुआत
अपनी पहचान पर गर्व जताने के लिए उन्होंने इंस्टाग्राम पर ‘रोल्स-रॉयस टर्बन चैलेंज' शुरू किया. उन्होंने ऐलान किया कि एक हफ्ते तक वह हर दिन अपनी पगड़ी के रंग से मेल खाती हुई अपनी रोल्स-रॉयस मोटर कार के साथ तस्वीर शेयर करेंगे. एक न्यूज़ रिपोर्ट के मुताबिक, हर दिन वह अलग रंग की पगड़ी पहनकर उसी रंग की लग्जरी कार के साथ नजर आए. यह केवल एक जवाब नहीं था, बल्कि पहचान और सफलता का जश्न बन गया. उनका संदेश साफ था- नफरत नहीं, गर्व और उपलब्धि ही उनकी पहचान होगी.
35 करोड़ की ‘फेस्टिवल ऑफ लाइट्स' कलेक्शन
कारों के प्रति अपने लगाव को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बाद में खुद को दिवाली पर पांच रोल्स-रॉयस कलिनन गिफ्ट कीं, जिनकी कुल कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये बताई गई. इन कारों को केसरिया, रूबी, पन्ना, नीलम और लाल जैसे आकर्षक रंगों में तैयार कराया गया. हर कार के साथ उनकी पगड़ी का रंग भी मेल खाता था. इस कलेक्शन को उन्होंने ‘फेस्टिवल ऑफ लाइट्स' (Festival of Lights) सेट नाम दिया.
नफरत का जवाब सफलता से
यह कहानी केवल महंगी कारों या लग्जरी लाइफस्टाइल की नहीं है, बल्कि आत्मसम्मान और सांस्कृतिक पहचान की भी है. एक अपमानजनक टिप्पणी को उन्होंने अपनी ताकत बना लिया. आज उनका ‘टर्बन चैलेंज' इस बात का प्रतीक माना जाता है कि कभी-कभी नफरत का सबसे प्रभावशाली जवाब बिना माफी मांगे मिली सफलता होती है.
(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)
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