ओडिशा की हो जनजाति में इंसान और कुत्ते के बीच हुई शादी, जानिए इस अंधविश्वास की पूरी कहानी

मचुआ और मानस सोरो प्रखंड के बंधशाही गांव के हो जनजाति के सदस्य हैं. अपने बच्चों की शादी के लिए उन्होंने कुत्ते की खोज तब शुरू की, जब उनके बच्चों का ऊपरी जबड़े में पहला दांत निकला, क्योंकि इन आदिवासियों का मानना है कि उनके बच्चों की जिंदगी पर ‘बुरा प्रभाव’ पड़ सकता है.

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बालासोर:  इंसान और कुत्ते के बीच शादी सुनने में भले ही अजीबो-गरीब लगे, लेकिन ओडिशा के बालासोर जिले के एक आदिवासी गांव में बृहस्पतिवार को इस अंधविश्वास के आधार पर एक नहीं, बल्कि दो ऐसी शादियां हुईं कि इससे बुरी आत्माओं (शक्तियों) से निजात मिलेगी. मचुआ सिंह को अपने 11 साल के बेटे तपन सिंह के लिए दुल्हन के रूप में एक ‘कुतिया' का इंतजाम करना पड़ा तथा मानस सिंह को अपनी सात वर्षीय बेटी लक्ष्मी के लिए दूल्हे के रूप में एक ‘कुत्ता' का प्रबंध करना पड़ा.

मचुआ और मानस सोरो प्रखंड के बंधशाही गांव के हो जनजाति के सदस्य हैं. अपने बच्चों की शादी के लिए उन्होंने कुत्ते की खोज तब शुरू की, जब उनके बच्चों का ऊपरी जबड़े में पहला दांत निकला, क्योंकि इन आदिवासियों का मानना है कि उनके बच्चों की जिंदगी पर ‘बुरा प्रभाव' पड़ सकता है.

सागर सिंह (28) ने कहा कि समुदाय की परंपरा के अनुसार सुबह सात बजे से एक बजे तक ये दोनों शादियां चलीं और सामूहिक भोज कराया गया. उसने कहा, ‘‘ समुदाय का मानना है कि बुरी आत्मा का साया शादी के बाद कुत्तों में चला जाता है. ... वैसे तो इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, लेकिन यह अंधविश्वास पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा है.''

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