किसी भी नई नौकरी की शुरुआत किसी के लिए उत्साह और उम्मीदों से भरी होती है. लेकिन, क्या हो अगर वही शुरुआत इतनी खराब हो जाए कि कर्मचारी कुछ ही हफ्तों में नौकरी छोड़ने पर मजबूर हो जाए? सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक कहानी ने यही सवाल खड़ा कर दिया है और ऑफिस कल्चर को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें एक मैनेजर ने खुद बताया, कि कैसे उनके यहां जॉइन किया एक नया कर्मचारी सिर्फ 3 हफ्तों में नौकरी छोड़ गया. मैनेजर के अनुसार, उन्होंने एक फ्रेशर को हायर किया था जो काफी स्मार्ट और सीखने के लिए उत्साहित था. लेकिन, जॉइनिंग के पहले ही दिन से चीजें बिगड़ने लगीं.
शुरुआत से ही गड़बड़ रहा सिस्टम
मैनेजर ने बताया, कि पहले दिन वह मीटिंग्स में इतने बिजी थे कि नए कर्मचारी को ठीक से गाइड नहीं कर पाए. उन्होंने बस इतना कहा कि वह किसी को शैडो कर ले. तीसरे दिन तक हालात ऐसे हो गए कि कर्मचारी ऑफिस में बैठा रहा, लेकिन कोई उससे बात तक नहीं कर रहा था. इतना ही नहीं, उसका सॉफ्टवेयर एक्सेस भी सेट नहीं किया गया था, जिससे वह काम शुरू ही नहीं कर पा रहा था.
my new hire quit after 3 weeks. He said we made him feel like a burden.
by u/jorjiarose in managers
दूसरे हफ्ते में बढ़ी दूरी
दूसरे हफ्ते में मैनेजर ने उसे एक टास्क दिया, लेकिन उसे जल्दी-जल्दी समझाकर खुद मीटिंग में चले गए. कर्मचारी से काम में गलती हो गई, जिस पर मैनेजर नाराज हो गए. उन्होंने डांटा तो नहीं, लेकिन उनका व्यवहार साफ तौर पर नाराजगी दिखा रहा था.
‘मैं बोझ जैसा महसूस कर रहा था'
कुछ ही दिनों बाद उस कर्मचारी ने एक मैसेज भेजकर नौकरी छोड़ दी. उसने लिखा, कि वह इस मौके के लिए आभारी है, लेकिन यह उसके लिए सही जगह नहीं है. बाद में उसने एक सहकर्मी को असली वजह बताई. उसे हर बार सवाल पूछने पर ऐसा महसूस होता था कि वह टीम पर बोझ है. यह सुनकर खुद मैनेजर को भी बुरा लगा और उन्होंने माना कि कहीं न कहीं उनकी गलती थी.
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं
यह पोस्ट वायरल होते ही सैकड़ों लोगों ने इस पर अपनी राय दी. कई यूजर्स ने कहा, कि यह एक खराब ऑनबोर्डिंग का उदाहरण है. एक यूजर ने लिखा, आपका ऑनबोर्डिंग प्रोसेस बहुत खराब है, इसे तुरंत ठीक करना चाहिए वरना ऐसा बार-बार होगा. दूसरे ने तंज कसते हुए कहा, क्या बिना किसी गाइडेंस के कोई खुद-ब-खुद सब सीख सकता है? वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, किसी भी नए कर्मचारी को बिना प्लान के ऑनबोर्ड नहीं किया जा सकता. उसे सही टूल्स और सपोर्ट देना जरूरी है.
क्या है असली समस्या?
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सिर्फ टैलेंट हायर करना ही काफी नहीं है. सही गाइडेंस, स्पष्ट निर्देश और सपोर्ट सिस्टम भी उतना ही जरूरी है. अगर शुरुआत सही न हो, तो एक अच्छा कर्मचारी भी खुद को अनदेखा और बेकार महसूस करने लगता है.
(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)
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