राजस्थान की झुलसाती गर्मी में जहां इंसानों का हाल बेहाल हो जाता है, वहां बेजुबान पक्षियों के लिए जिंदगी और भी मुश्किल हो जाती है. लेकिन, इसी तपती धरती पर एक शख्स ने उम्मीद की ऐसी मिसाल पेश की है, जो न सिर्फ दिल छू लेती है बल्कि इंसानियत पर भरोसा भी बढ़ा देती है.
राजस्थान के बाड़मेर में गर्मियों के दौरान तापमान अक्सर 50°C के पार पहुंच जाता है. ऐसी भीषण गर्मी में जहां पानी के स्रोत सूख जाते हैं और पेड़ों की छांव भी राहत नहीं दे पाती, वहीं पक्षियों के लिए जिंदा रहना किसी चुनौती से कम नहीं होता. इसी मुश्किल वक्त में स्थानीय पर्यावरण प्रेमी नरपत सिंह राजपुरोहित, जिन्हें ‘ग्रीन मैन' के नाम से जाना जाता है, एक अनोखी पहल के साथ सामने आए हैं.
नारियल के खोल से बना ठंडा आशियाना
नरपत सिंह फेंके गए नारियल के खोल को इकट्ठा कर उन्हें पक्षियों के लिए घोंसले में बदल देते हैं. ये खोल प्राकृतिक रूप से ठंडे रहते हैं, जिससे ये प्लास्टिक या धातु के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक आश्रय बन जाते हैं. इन घोंसलों को पेड़ों पर टांगा जाता है, जहां पक्षियों को तेज धूप से राहत मिलती है और उन्हें सुरक्षित जगह मिलती है. खास बात यह है कि ये पूरी तरह इको-फ्रेंडली और बेहद कम लागत में तैयार हो जाते हैं.
देखें Video:
सिर्फ घोंसले नहीं, पानी की भी व्यवस्था
पिछले 7 सालों से नरपत सिंह सिर्फ घोंसले ही नहीं बना रहे, बल्कि पक्षियों के लिए जलकुंड और परिंडे भी लगा रहे हैं. हर साल हजारों मिट्टी के बर्तन और पानी के स्रोत तैयार कर वे इस भीषण गर्मी में बेजुबानों की जिंदगी आसान बना रहे हैं.
छोटी पहल, बड़ा असर
आज बाड़मेर के कई इलाकों में ये नारियल के घोंसले पेड़ों पर लटकते नजर आते हैं, जो चुपचाप हजारों पक्षियों को जीवन दे रहे हैं. यह पहल दिखाती है कि पर्यावरण की रक्षा के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि एक सच्ची सोच और छोटे प्रयासों की जरूरत होती है.
यह भी पढ़ें: भारत लौटना NRIs के लिए क्यों है मुश्किल? बेल्जियम में रह रहे भारतीय ने बताई ऐसी वजह, यकीन नहीं होगा
न बाथरूम, न किचन… फिर भी 1 लाख रु किराया! न्यूयॉर्क में जेल की कोठरी से भी छोटा घर देख लोग हैरान














