Why do clocks always move to the right: घड़ी आज हर घर की जरूरत है. मोबाइल हो या स्मार्टवॉच, समय देखने की आदत हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि clock hands clockwise क्यों घूमती हैं? असल में इसका राज बहुत पुराना है और हमें इतिहास की तरफ ले जाता है.
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धूपघड़ी से शुरू हुई कहानी (sundial history)
प्राचीन ग्रीस के दौर में sundial यानी धूपघड़ी का इस्तेमाल होता था. उस समय लोग उत्तरी गोलार्ध में रहते थे. सूरज पूरब से निकलकर आसमान के दक्षिण हिस्से से गुजरते हुए पश्चिम की ओर जाता है. धूपघड़ी में एक सीधी छड़ी लगाई जाती थी. सूरज की रोशनी पड़ते ही उसकी परछाई बाएं से दाएं की तरफ घूमती थी. यही परछाई समय बताने का जरिया बन गई, यानी समय की दिशा वही मानी गई जिस तरफ छाया चलती थी.
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पहली घड़ियों ने अपनाई वही दिशा (ghadi ki sui daahine kyon ghumti hai)
जब 12वीं से 15वीं सदी के बीच यूरोप में पहली मैकेनिकल घड़ियां बनीं, तो कारीगरों ने उसी दिशा को अपनाया जो sundial में दिखती थी. धीरे-धीरे यही दिशा स्टैंडर्ड बन गई. अगर सुइयां उलटी दिशा में घूमतीं, तो लोगों को समय समझने में दिक्कत होती. आदत और परंपरा ने मिलकर clockwise movement को दुनिया भर में स्वीकार कर लिया.
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घड़ी के पीछे का दिलचस्प विज्ञान (why clock moves clockwise)
हम रोज घड़ी देखते हैं, लेकिन उसके पीछे का विज्ञान और इतिहास नहीं जानते. ऐसी जानकारी हमें यह समझने में मदद करती है कि आज की तकनीक भी पुराने अनुभवों पर टिकी है. अब जब भी घड़ी की सुइयां दाहिने घूमती दिखें, तो समझ जाइए कि यह सिर्फ डिजाइन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और विज्ञान का नतीजा है. समय बदलता है, लेकिन उसकी दिशा वही रहती है.
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